Home उत्तराखंड देहरादून उत्‍तराखण्‍ड बनने के 23 साल बाद भी अपना भु कानुन नही सशक्‍त भु कानुन बने
देहरादून

उत्‍तराखण्‍ड बनने के 23 साल बाद भी अपना भु कानुन नही सशक्‍त भु कानुन बने

28साल संघर्ष करने के बाद 9नवंबर 2000में तत्कालीन सरकार के टप्रधानमंत्री अटल जी ने यूपी से अलग करके उत्तराचंल के नाम से 27वे राज्य की घोषणा की छै साल तक उत्तराचंल के नाम से इस राज्य का नाम चला बाद में जनवरी 2007मे उत्तरांचल का नाम बदलकर उत्तराखंड राज्य रखा गया।ये 28सालो में कुमाऊं व गढ़वाल के युवाओं व बुजुर्गो,व महिलाओं ने लगातार आंदोलन के जरिए तत्कालीन सरकार को यूपी से अलग राज्य के लिए मांग रखी।सन 1994से उत्तराखंड प्रथक राज्य के लिए उत्तराखंड क्रांति दल ने कुमाऊं व गढ़वाल के युवाओं व बुजुर्गो व महिलाओं को साथ लेकर जगह जगह पर आंदोलन करके उत्तराखंड प्रथक के लिए संघर्ष किया। उत्तराखंड प्रथक राज्य के आन्दोलन में सन 1सितबर खटीमा गोली कांड,2सितंबर मंसूरी गोली कांड व 2अकटूबर मुजफ्फरनगर नगर कांड में शहीदों को श्रद्धांजलि देते

 हुए शत् शत् नमन किया जाता है।जिन महिलाओं व युवतियों व युवाओं के लिए संन 1994मे तत्कालीन यूपी सरकार ने दुराचार व दुर्व्यवहार करके उत्तराखंड प्रथक राज्य के उत्तराखंड क्रांति दल के आन्दोलन कारी लोगों लिए किया। प्रताप सिंह नेगी समाजसेवी ने बताया उत्तराखंड प्रथक राज्य के लिए लड रहे 28सालो क्रांतिकारियों व शहीदों का सपना धरा ही धरा रह गया। उत्तराखंड प्रथक राज्य बनाने का मकसद यही था हम उत्तराखंड को एक पहाड़ी राज्य के तौर पर बिकास व स्वास्थ्य व शिक्षा रोजगार का मार्गदर्शन करेंगे लेकिन 23हो जाने के बाद भी उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार बिकास तो खाली कागजों व हवाई घोषणा में होते आ रहा है।ये 23साल में वर्तमान सरकार ही नहीं बल्कि तत्कालीन सरकार भी जिम्मेदार है। उत्तराखंड राज्य में लंबे समय से अलग-अलग संगठनों के द्बारा व उत्तराखंड क्रांति दल के द्बारा के द्बारा तत्कालीन सरकार व वर्तमान सरकार को अवगत कराया गया उत्तराखंड राज्य में हूं कानून लागू कराने के लिए लेकिन आज तक किसी भी सरकार ने हूं कानून के लिए को कोई सकारात्मक सुझाव नहीं दिया। अभी चंद दिनों में उत्तराखंड क्रांति दल ने मुख्यमंत्री आवास कूच करके उत्तराखंड में भू कानून लागू कराने के लिए पहल की। उत्तराखंड राज्य में हूं कानून लागू होना जरूरी है ताकि उत्तराखंड का पलायन रुक सके।

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