Home उत्तराखंड देहरादून दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में “क्लाइमेट चेंज – बच्चों की नजर से” कार्यक्रम का सफल आयोजन।
देहरादून

दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में “क्लाइमेट चेंज – बच्चों की नजर से” कार्यक्रम का सफल आयोजन।

रिपोर्ट विक्रम पटवाल

देहरादून मे अब गौरय्या कम दिखती है लाल बासमती गायब हो गया है
धाद के हरेला 26 मे बच्चों ने क्लाइमेंट चेंज को बताया अपनी नजर से

धाद के हरेला अभियान के अंतर्गत दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में “क्लाइमेट चेंज – बच्चों की नजर से” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहां स्कूल बच्चों ने सूक्ष्म स्तर पर अपने घर, आस पड़ोस व इलाके में विभिन्न माध्यमों की जांच पड़ताल की जैसे पेड़ पौधे, जीव जंतु, फसलें एवं आपदा, और इसका असर वैश्विक स्तर पर होने वाले क्लाइमेट चेंज से जोड़ा आयोजन का परिचय देते हुए हिमांशु आहूजा ने कहा
धाद का हरेला अभियान अपने सोलहवें साल में प्रवेश कर गया है। पौधारोपण, जनसंपर्क एवं हरेला विमर्श के जरिए यह अभियान लगातार समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैला रहा है। अब इसमें हमने आने वाली पीढ़ी की नजर से हमारे मौसम के बदलाव को देखने की पहल की है.
कार्यक्रम का संचालन आशा डोभाल ने किया। अपना पक्ष रखते हुए छात्रा
अंतरिक्षा प्रताप सिंह ने समझाया कि कैसे जुगनू केंचूवा और कम्बल कीड़े जैसे सूक्ष्म जीव हमारे वातावरण के लिए बेहद जरुरी है लेकिन परिस्थितिकी परिवर्तन के चलते ये सब धीरे धीरे कम होते जा रहे है.

आमाना खान ने कहा किस तरह हर साल बेमौसमी बदलावो की वजह से मच्छर और मलेरिया जैसे प्रकोप बढ़ रहे है. क्योंकि गर्मी बेहतशा बढ़ती जा रही है
दिव्यांशी काम्बोज ने बताया उन्हें उनके पापा से जानकारी मिली कि बढ़ते शहरीकरण और मौसमी प्रभावो की वजह से लाल बास्मती की किस्म देहरादून से गायब हो गयी है
सदब ने समझाया कि उनके निवास कौलगढ़ मे गौरय्या पहले बहुत आम बढ़ी संख्या मे दिखती थी जो अब लगभग गायब हो गयी है.
आयोजन मे हरबंस कपूर राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, कौलागढ़ से कुमारी सदब, सपना वर्मा और शहीद मेख बहादुर गुरुंग कैंट कन्या इंटर कॉलेज से दिव्यांशी काम्बोज,
अंतरिक्षा प्रताप सिंह एवं आमना खान ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के अंत में बच्चों की बात को आगे बढ़ाते हुए भारत ज्ञान विज्ञान समिति के विजय भट्ट ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का समापन संबोधन धाद के उपाध्यक्ष गणेश चन्द्र उनियाल ने किया।
कार्यक्रम में डॉ एस एस खैरा, देवेन्द्र कांडपाल, तन्मय ममगाईं, गणेश उनियाल, आलोक सरीन, बी एस रावत, के नैथानी, महावीर रावत, प्रदीप डोभाल, अनिमेष गुप्ता, विजय भट्ट, नरेन्द्र सिंह रावत, कल्पना बहुगुणा, डॉ विद्या सिंह, नीना रावत, ममता डोभाल आदि उपस्थित रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

स्वैच्छिक चकबंदी मॉडल को जमीन पर उतारने की पहल, राजस्व सचिव ने जिलाधिकारियों को दिए निर्देश

रिपोर्ट जगमोहन जिज्ञासु देहरादून/उत्तराखंड। पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षों से बिखरी कृषि भूमि...

देवभूमि कार्ड नहीं,सशक्त भू-कानून और मूल निवास का अधिकार चाहिए : उत्तराखण्ड क्रान्ति दल

देहरादून। उत्तराखण्ड में जमीनों की धड़ल्ले से हो रही खरीद-फरोख्त पर विवाद का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया प्रकरणों के सार्वजनिक होने के बाद उत्तराखण्ड क्रान्ति दल एक बार फिर इस गंभीर मुद्दे पर मुखर हो गया है। कचहरी रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में भू-कानून और सरकार के प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ को लेकर पार्टी की महत्वपूर्ण मंथन बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ की अवधारणा, प्रदेश में लगातार हो रही जमीनों की खरीद-फरोख्त तथा मूल निवासियों के अधिकारों से जुड़े गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत, स्पष्ट और प्रभावी भू-कानून की आवश्यकता है। सरकार जिस प्रकार ‘देवभूमि कार्ड’ की व्यवस्था लागू करने की बात कर रही है, वह प्रदेश की मूल समस्या का समाधान नहीं है। इससे उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के संवैधानिक, सामाजिक और भूमि संबंधी अधिकारों को वह संरक्षण नहीं मिलेगा जिसकी आज आवश्यकता है। उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बाहरी व्यक्तियों एवं प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से खुलेआम जमीन खरीदने और बेचने के विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं। यह स्थिति उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान, जनसांख्यिकीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। टोडरिया ने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के बजाय राज्य सरकार उदासीन रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पौड़ी जिले के सबदरखाल में 144 नाली जमीन बिकने का मामला सामने आया है, उससे स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड सरकार का भू-कानून जमीनों की बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भू-कानून भी भू माफियाओं के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया प्रतीत होता है। टोडरिया ने उत्तराखण्ड सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही प्रदेश में जमीनों की इस बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक नहीं लगाई गई तो आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तराखण्ड क्रान्ति दल गांव-गांव जाकर सरकार की इस हिमालय विरोधी सोच और उसकी भू-कानून नीति की पोल जनता के सामने खोलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की जमीन को बाजार बनने नहीं दिया जाएगा और इस लड़ाई को निर्णायक स्तर तक ले जाया जाएगा। केंद्रीय महामंत्री सेवानिवृत्त कर्नल देवरानी ने कहा कि जहां प्रदेश की जनता उत्तराखण्ड सरकार से मूल निवास प्रमाण-पत्र की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार ‘देवभूमि कार्ड’ बनाकर 15 साल के निवास के आधार पर निवास प्रमाण-पत्र देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह प्रदेश के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा करना चाहती है या बाहरी लोगों के लिए स्थायी बसावट का रास्ता आसान करना चाहती है।...

देहरादून- उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रदेश कमेटी की बैठक।

आज दिनांक 20 जुलाई 2026 को उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की...