रिपोर्ट जगमोहन डांगी
3 अक्टूबर को जारी हुआ था पत्र, 15 अक्टूबर को आयोजित शिविर में आम जनता की उपस्थिति रही नगण्य
पौड़ी गढ़वाल। सरकार की मंशा जनता को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की है, लेकिन जब योजनाओं की जानकारी ही लोगों तक न पहुंचे तो ऐसे आयोजनों का उद्देश्य प्रभावित होना स्वाभाविक है। कुछ ऐसा ही मामला विकासखंड कल्जीखाल में सामने आया, जहां मुख्यमंत्री की पहल पर संचालित सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित बहुउद्देशीय शिविर प्रचार-प्रसार के अभाव में अपेक्षित जनभागीदारी नहीं जुटा सका। हालात यह रहे कि कई जनप्रतिनिधियों को शिविर के आयोजन की जानकारी तक नहीं मिल पाई, जबकि आम जनता की उपस्थिति भी नगण्य रही।
15 अक्टूबर को विकासखंड कल्जीखाल के ब्लॉक कार्यालय परिसर में बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर के आयोजन को लेकर खंड विकास अधिकारी की ओर से 3 अक्टूबर को पंचायत प्रतिनिधियों तथा ब्लॉक एवं जिला स्तर के संबंधित विभागों को प्रतिभाग करने के निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद शिविर की सूचना सभी जनप्रतिनिधियों तक नहीं पहुंच सकी।
शिविर में ब्लॉक प्रमुख गीता देवी, ज्येष्ठ प्रमुख संजय पटवाल और कनिष्ठ प्रमुख दीपक असवाल सहित कुछ जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा ब्लॉक स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी भी शिविर में उपस्थित रहे। हालांकि, आम जनता की बेहद कम भागीदारी के चलते शिविर का अपेक्षित लाभ लोगों तक पहुंचने पर सवाल खड़े हो गए।
आधुनिक संचार के दौर में सूचना तंत्र पर सवाल
आज के डिजिटल दौर में भी यदि किसी सरकारी कार्यक्रम की जानकारी जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों तक नहीं पहुंच पा रही है, तो यह संबंधित विभागों की सूचना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। बहुउद्देशीय शिविरों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देना, उनकी समस्याओं का समाधान करना और पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ना है। ऐसे में व्यापक प्रचार-प्रसार के अभाव में इन आयोजनों की उपयोगिता प्रभावित होना चिंता का विषय है।
पहले भी सामने आ चुकी है ऐसी स्थिति
यह पहला मामला नहीं है, जब किसी सरकारी कार्यक्रम की सूचना जनप्रतिनिधियों तक नहीं पहुंचने की बात सामने आई हो। इससे पहले पिछले सप्ताह पंचायत प्रतिनिधियों के लिए आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर की जानकारी भी कई जनप्रतिनिधियों तक नहीं पहुंच पाई थी। इस कार्यक्रम में राज्य मंत्री हेमंत द्विवेदी ने अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया था।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से सूचना के प्रसार और कार्यक्रमों के समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि निर्धारित तिथि से पहले संबंधित जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों तक सूचना प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए, तो ऐसे शिविरों में अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है।
जवाबदेही तय करने और प्रचार-प्रसार मजबूत करने की जरूरत
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न शिविरों का आयोजन कर रही है। लेकिन यदि इन कार्यक्रमों की जानकारी ही लोगों तक नहीं पहुंचे, तो सरकारी प्रयासों का अपेक्षित परिणाम मिलना मुश्किल है।
ऐसे में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही सूचना तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है। ग्राम पंचायत स्तर पर समय रहते सूचना पहुंचाने, जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित करने और विभिन्न संचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग करने से ही इन शिविरों को वास्तव में जनोपयोगी बनाया जा सकता है।

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