रिपोर्ट जगमेाहन डांगी
पौड़ी। पौड़ी जनपद के खांड्यूंसैंड क्षेत्र में गुलदार के हमले में पांच वर्षीय मासूम आरुषि की मौत के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। मंगलवार शाम करीब छह बजे गुलदार ने कृष्ण कुमार की पांच वर्षीय पुत्री आरुषि को अपना निवाला बना लिया। दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है, वहीं ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग और शासन-प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा।
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने वन मंत्री सुबोध उनियाल और मौके पर पहुंचे पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने ‘वन मंत्री पौड़ी आओ’ के नारे लगाते हुए कहा कि पौड़ी जनपद में गुलदार के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। कई परिवार इन हमलों से प्रभावित हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वन मंत्री ने अब तक पौड़ी पहुंचकर स्थिति का जायजा नहीं लिया।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर पहाड़ के लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? कब तक ग्रामीण जंगली जानवरों के खौफ के साये में जीने को मजबूर रहेंगे? लोगों ने कहा कि गुलदार के आतंक से निजात दिलाने के लिए शासन और वन विभाग को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
घटनास्थल पर पहुंचे विधायक राजकुमार पोरी को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने कहा कि केवल घटनाओं के बाद आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है। गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में नियमित गश्त, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और वन्यजीवों के आतंक पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।
वहीं, डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव ने बताया कि गुलदार को आदमखोर घोषित करने के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र भेज दिया गया है। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।
मासूम की मौत ने एक बार फिर पहाड़ों में मानव-वन्यजीव संघर्ष और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि शासन और वन विभाग इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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