पौड़ी गढ़वाल | यमकेश्वर।पोखडा
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में जमीनों को बचाने, चकबंदी को बढ़ावा देने और ग्रामीणों को उनके खेतों का मालिकाना हक दिलाने के उद्देश्य से 27 अक्टूबर 2026 को पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर ब्लॉक सभागार में एंव 28 अक्टूबर को पौखडा मे चकबंदी मंच की कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में मंच के अध्यक्ष श्री केवानंद तिवाड़ी और उपाध्यक्ष श्री भूपेंद्र सिंह बागलाणा मौजूद रहे।
कार्यशाला में यमकेश्वर क्षेत्र के ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, जिला पंचायत सदस्यों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। इस दौरान चकबंदी के महत्व, भूमि संबंधी समस्याओं और पहाड़ों में जमीनों को सुरक्षित रखने के विषय पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यशाला में ग्रामीणों ने बताया कि वे चकबंदी के प्रति जागरूक हो रहे हैं और आगे आकर अपनी जमीनों से संबंधित ऑनलाइन एवं ऑफलाइन आवेदन तहसीलों में भेज रहे हैं। ग्रामीणों ने चकबंदी मंच की पहल की सराहना करते हुए कहा कि पहाड़ों में चकबंदी की बेहद जरूरत है। यदि समय रहते जमीनों को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में पहाड़ों की जमीन, संस्कृति और पारंपरिक पहचान पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
ग्रामीणों ने कहा कि खेतों को गोखातों से अलग कर जमीन का अधिकार अपने नाम दर्ज कराने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने चिंता जताई कि जमीनों पर अनियंत्रित कब्जे और भूमि के दुरुपयोग से पहाड़ों का प्राकृतिक स्वरूप और ग्रामीण संस्कृति प्रभावित हो सकती है।

कार्यशाला में यह भी कहा गया कि सरकार ने चकबंदी को लेकर नीति बनाई है, लेकिन अब आवश्यकता उस नीति को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने की है। ग्रामीणों की बढ़ती जागरूकता और तहसीलों में भेजे जा रहे आवेदनों को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।
संदेश स्पष्ट है—पहाड़ की जमीन बचेगी, तभी गांव बचेंगे और गांव बचेंगे, तभी पहाड़ की संस्कृति और पहचान सुरक्षित रहेगी।
रिपोर्ट: भूपेंद्र सिंह बागलाणा

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