विकास के नाम पर अधिग्रहित की किसानों की जमीन, सड़क पर दौड़ रहे वाहन, लेकिन मुआवजे के लिए आज भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे ग्रामीण
रिखणीखाल/पौड़ी गढ़वाल। विकास कार्यों के नाम पर ग्रामीणों की जमीन तो अधिग्रहित कर ली गई, लेकिन छह साल बीत जाने के बाद भी काश्तकारों को उसका मुआवजा नहीं मिल पाया है। मामला पौड़ी गढ़वाल जनपद के रिखणीखाल प्रखंड के ग्राम गवाणा का है, जहां सिलगांव संपर्क सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2019-20 में ग्रामीणों की कृषि भूमि अधिग्रहित की गई थी। सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन भी शुरू हो गया है, लेकिन प्रभावित काश्तकार आज भी अपने हक के मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।
छह साल से आश्वासनों के भरोसे किसान
ग्राम गवाणा के काश्तकारों का कहना है कि वर्ष 2019-20 में सिलगांव संपर्क सड़क के निर्माण के दौरान उनकी कृषि भूमि ली गई थी। उस समय प्रशासन एवं लोक निर्माण विभाग की ओर से जल्द मुआवजा दिए जाने का आश्वासन दिया गया था। ग्रामीणों ने भी सड़क निर्माण में सहयोग करते हुए अपनी जमीन दी, लेकिन छह साल गुजर जाने के बाद भी उन्हें एक रुपये तक का भुगतान नहीं किया गया।
काश्तकारों के अनुसार, इस संबंध में कई बार लोक निर्माण विभाग, लैंसडौन तथा पौड़ी जिला प्रशासन को लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ और उन्हें हर बार केवल आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है।
जमीन भी गई, आजीविका पर भी पड़ा असर
गवाणा जैसे पहाड़ी और सीमांत गांवों में पहले से ही रोजगार एवं आजीविका के सीमित साधन हैं। ऐसे में कृषि भूमि का सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहण होने से कई परिवारों की खेती-किसानी प्रभावित हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार और संबंधित विभाग मुआवजा देने की व्यवस्था नहीं कर सकते थे, तो आखिर उनकी जमीन क्यों ली गई? विकास कार्यों में ग्रामीणों का सहयोग लेने के बाद उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखना कहां तक उचित है?
जिलाधिकारी से मुआवजे के भुगतान की मांग
ग्राम गवाणा के प्रभावित काश्तकारों ने जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि सिलगांव सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई भूमि का नियमानुसार सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा ब्याज सहित शीघ्र भुगतान किया जाए। साथ ही, छह वर्षों से लंबित इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान कर मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। अब सवाल यह है कि सड़क निर्माण के छह साल बाद भी अपने हक के लिए भटक रहे गवाणा के काश्तकारों को आखिर कब न्याय मिलेगा?

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