Home उत्तराखंड देहरादून देहरादुन-आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने इस पर्यावरण दिवस में गांव वालों के शपथ समारोह आयोजित किया ।
देहरादून

देहरादुन-आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने इस पर्यावरण दिवस में गांव वालों के शपथ समारोह आयोजित किया ।

रिपोर्ट  प्रताप सिंह नेगी

देहरादून डोईवाला भोगपुर सैक्टर में आज बिस्व पर्यावरण दिवस समारोह के उपलक्ष्य में भोगपुर सैक्टर की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने इस पर्यावरण दिवस में गांव वालों के शपथ समारोह आयोजित किया । शपथ समारोह में

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने पर्यावरण को स्वच्छ व बचाने के लिए संकल्प लिया। कनुप्रिया आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया हमारे लिए पेड़ पौधे ही हमारे लिए एक रक्षक के तौर पर है। आंगनबाड़ी सुपरवाइजर सालिता अग्रवाल ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व आंगनबाड़ी केंद्र के अभिभावकों को शपथ दिलाते हुए यह बताया आज के युग में हमारे देश प्रदेश में दिन पर दिन पानी की कमी होने का मुख्य कारण यह है। हमारे बनों व हमारे आस पास छाया दार पेड़ पौधे अनगिनत तौर पर हर साल काटे जाते हैं। लेकिन उनके बदले में हम लोग कभी दूसरे पेड नहीं लगाते हैं। जिससे एक पर्यावरण ही दूषित नहीं हो रहा है आज जगह जगह पर हमारे पानी के नौले सूखते जा रहे हैं। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बाज,उदीस के पेड़ ऐसे हैं जो पानी अपनी ओर खिंचते है उन पेड़ों की कमी के कारण आज उत्तराखंड में भी पानी की समस्याएं बनती जा रही है। लक्ष्मी रेनू ने बताया हमारे उत्तराखंड में गर्मियों के सीज़न में आग लगाने की प्रथा ग़लत है इस आग लगाने से बहुत से छाया दार व जंगली फल देने वाले पेड़ नष्ट हो जाते हैं।अगर ऐसे ही हम लोग हर साल आग लगाकर बनों से पेड़ नष्ट कर देंगे और अनगिनत छोटे छोटे पेड़ों को काटते रहेंगे तो आने वाले भविष्य में जैसे दिल्ली, बंगलौर, गुड़गांव, नोएडा आदि शहरों में पानी की कमी हो रही है ऐसे ही हमारे उत्तराखंड में भी होने लगेगा।इस पर्यावरण दिवस में शपथ समारोह के बाद पेड़ भी लगाये गए और भी लोगों पेड़ लगाने के अभियान चलाया गया।इस दौरान आंगनबाड़ी सुपरवाइजर सालिता अग्रवाल, निर्मला भट्ट, लक्ष्मी रेनू,निशा लिस्तारबाड,कानूप्रिया आदि आंगनबाड़ी केन्द्र के अभिभावक शामिल रहे।

अन्‍य खबरो के लिए नीचे लिंक पर जाए। 

युटयुब चैनलhttps://www.youtube.com/channel/UCVCkmiPBWlGDz-Vyi8c2Xlg

फेसबुक पेजhttps://www.facebook.com/Voicemountains

व्‍हाटअपhttps://chat.whatsapp.com/KX9oESnS9NHE5fGoUMwOs

Contact- jagjigyasu@gmail.com  9811943221

Related Articles

देवभूमि कार्ड नहीं,सशक्त भू-कानून और मूल निवास का अधिकार चाहिए : उत्तराखण्ड क्रान्ति दल

देहरादून। उत्तराखण्ड में जमीनों की धड़ल्ले से हो रही खरीद-फरोख्त पर विवाद का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया प्रकरणों के सार्वजनिक होने के बाद उत्तराखण्ड क्रान्ति दल एक बार फिर इस गंभीर मुद्दे पर मुखर हो गया है। कचहरी रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में भू-कानून और सरकार के प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ को लेकर पार्टी की महत्वपूर्ण मंथन बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ की अवधारणा, प्रदेश में लगातार हो रही जमीनों की खरीद-फरोख्त तथा मूल निवासियों के अधिकारों से जुड़े गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत, स्पष्ट और प्रभावी भू-कानून की आवश्यकता है। सरकार जिस प्रकार ‘देवभूमि कार्ड’ की व्यवस्था लागू करने की बात कर रही है, वह प्रदेश की मूल समस्या का समाधान नहीं है। इससे उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के संवैधानिक, सामाजिक और भूमि संबंधी अधिकारों को वह संरक्षण नहीं मिलेगा जिसकी आज आवश्यकता है। उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बाहरी व्यक्तियों एवं प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से खुलेआम जमीन खरीदने और बेचने के विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं। यह स्थिति उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान, जनसांख्यिकीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। टोडरिया ने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के बजाय राज्य सरकार उदासीन रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पौड़ी जिले के सबदरखाल में 144 नाली जमीन बिकने का मामला सामने आया है, उससे स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड सरकार का भू-कानून जमीनों की बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भू-कानून भी भू माफियाओं के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया प्रतीत होता है। टोडरिया ने उत्तराखण्ड सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही प्रदेश में जमीनों की इस बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक नहीं लगाई गई तो आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तराखण्ड क्रान्ति दल गांव-गांव जाकर सरकार की इस हिमालय विरोधी सोच और उसकी भू-कानून नीति की पोल जनता के सामने खोलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की जमीन को बाजार बनने नहीं दिया जाएगा और इस लड़ाई को निर्णायक स्तर तक ले जाया जाएगा। केंद्रीय महामंत्री सेवानिवृत्त कर्नल देवरानी ने कहा कि जहां प्रदेश की जनता उत्तराखण्ड सरकार से मूल निवास प्रमाण-पत्र की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार ‘देवभूमि कार्ड’ बनाकर 15 साल के निवास के आधार पर निवास प्रमाण-पत्र देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह प्रदेश के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा करना चाहती है या बाहरी लोगों के लिए स्थायी बसावट का रास्ता आसान करना चाहती है।...

दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में “क्लाइमेट चेंज – बच्चों की नजर से” कार्यक्रम का सफल आयोजन।

रिपोर्ट विक्रम पटवाल देहरादून मे अब गौरय्या कम दिखती है लाल बासमती...

देहरादून- उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रदेश कमेटी की बैठक।

आज दिनांक 20 जुलाई 2026 को उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की...