रिपोर्ट दीपक मैठाणी
कथित VIP कोण की निष्पक्ष जांच, पहचान और भूमिका स्पष्ट करने की मांग
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड के चार वर्ष पूरे होने के बावजूद मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब सामने नहीं आने के विरोध में पहाड़ स्वाभिमान सेना ने शुक्रवार को देहरादून स्थित CBI कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने अंकिता भंडारी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि तीन मुख्य दोषियों को न्यायालय से सजा मिलना न्याय की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन इससे उन सवालों का अंत नहीं हो जाता जिन्हें अंकिता का परिवार और उत्तराखंड की जनता लगातार उठाती रही है। अगस्त 2026 में तीन दोषियों की जमानत याचिकाएं भी अदालत द्वारा खारिज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।

अब सवाल सीधे CBI से है—कथित VIP कोण की जांच कहां पहुंची?
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिस कथित VIP कोण को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, उसकी पहचान, भूमिका और मामले से संभावित संबंध को लेकर जनता के सामने अभी तक स्पष्ट तथ्य नहीं हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता का कोई प्रमाण मिलता है तो उसके प्रभाव, पद या राजनीतिक-सामाजिक पहुंच की परवाह किए बिना कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई प्रमाण नहीं मिलता, तो जांच एजेंसी को तथ्यों के आधार पर यह स्थिति भी स्पष्ट करनी चाहिए।
अंकिता के न्याय का अर्थ केवल दोषियों को सजा मिलना नहीं, बल्कि मामले से जुड़े हर अनुत्तरित सवाल का तथ्यात्मक जवाब मिलना भी है।
पहाड़ स्वाभिमान सेना की प्रमुख मांगें
1. CBI जांच को पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्धता के साथ आगे बढ़ाया जाए।
2. कथित VIP कोण की जांच में अब तक सामने आए तथ्यों को कानून की सीमाओं के भीतर जनता के सामने स्पष्ट किया जाए।
3. कथित VIP की पहचान और भूमिका की जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए।
4. यदि किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता के प्रमाण सामने आते हैं तो उसके विरुद्ध बिना किसी दबाव के कानूनी कार्रवाई की जाए।
5. साक्ष्यों के संरक्षण तथा साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने के आरोपों से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो।
6. अंकिता के परिवार द्वारा उठाए गए सवालों और शिकायतों को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाए।
7. CBI जांच की प्रगति के संबंध में जनता को तथ्यात्मक और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
8. मामले से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति, परिस्थिति और साक्ष्य की जांच हो—चाहे व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
पंकज उनियाल, अध्यक्ष, पहाड़ स्वाभिमान सेना

पंकज उनियाल ने कहा कि “चार वर्ष बाद भी यदि अंकिता के न्याय के लिए उत्तराखंड की जनता को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, तो यह बेहद गंभीर सवाल है। न्याय केवल अदालत में सजा होने तक सीमित नहीं हो सकता। जिन सवालों ने पूरे उत्तराखंड को आंदोलित किया, उनका तथ्यात्मक जवाब सामने आना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि अंकिता की बरसी केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि सत्ता और जांच एजेंसियों से जवाब मांगने का दिन भी है।
अधिवक्ता संदीप चमोली ने कहा
अधिवक्ता संदीप चमोली ने कहा कि “तीन मुख्य दोषियों को सजा मिलना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन अंकिता प्रकरण से जुड़े बाकी सवालों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। जनता जानना चाहती है कि जिस कथित VIP कोण को लेकर इतने वर्षों से सवाल उठ रहे हैं, उसकी जांच में अब तक क्या तथ्य सामने आए हैं और आगे की कार्रवाई क्या होगी।”
उन्होंने कहा कि “कानून की नजर में कोई व्यक्ति छोटा-बड़ा नहीं होना चाहिए। यदि किसी की भूमिका प्रमाणित होती है तो कार्रवाई हो और यदि आरोप निराधार हैं तो जांच एजेंसी तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करे। लेकिन सवालों को अनिश्चितकाल तक लटकाए रखना स्वीकार्य नहीं हो सकता।”
UKD नेता लूशुन टोडरिया ने कहा
लूशुन टोडरिया ने कहा कि CBI जैसी केंद्रीय जांच एजेंसी से जनता को निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की अपेक्षा है। यदि जांच के दौरान किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके प्रभाव या पद की परवाह किए बिना कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
“अंकिता की आवाज दबेगी नहीं”
पहाड़ स्वाभिमान सेना ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि सच्चाई सामने लाने और कानून के अनुसार दोषी पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा—
«“अंकिता को न्याय चाहिए, सिर्फ आश्वासन नहीं।
सवालों के जवाब चाहिए, सिर्फ बयान नहीं।
जांच का निष्कर्ष चाहिए, सिर्फ इंतजार नहीं।”»
पहाड़ स्वाभिमान सेना ने CBI से मांग की कि जांच को तार्किक और अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए तथा अंकिता के परिवार और उत्तराखंड की जनता के मन में मौजूद सवालों का तथ्यात्मक जवाब दिया जाए।
संगठन ने कहा कि अंकिता भंडारी की न्याय की आवाज चार साल बाद भी दबने नहीं दी जाएगी। जब तक मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के तथ्य सामने नहीं आते, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।यह संस्करण प्रेस में देने के लिए अधिक हेडलाइन-केंद्रित और आक्रामक है, जबकि कथित VIP के बारे में बिना प्रमाण कोई दोषसिद्धि नहीं करता।
प्रदर्शन करने वालों राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल, महिला अध्यक्ष सुलोचना इष्टवाल, संदीप चमोली अध्यक्ष अधिवक्ता सेवा मंच, संग्राम सिंह पुंडीर
नवनीत कुकरेती अधिवक्ता
हरेन्द्र सिंह बेदी अधिवक्ता
कीर्तिवर्धन बिष्ट अधिवक्ता
प्रदीप फरस्वान अधिवक्ता
हिमांशु शर्मा सह संयोजक व्यापार प्रकोष्ठ उत्तराखंड, यूकेडी से मीनाक्षी घिल्डियाल, दीप्ति दूधपूरी
राष्ट्रीय बजरंग दल अध्यक्ष सनी गुप्ता, पूर्व रायपुर विधानसभा अध्यक्ष अनिल डोभाल, ललित श्रीवास्तव, अंकित सजवान, राकेश नेगी , कपिल डोभाल, आशीष कुकरेती, आकांक्षा नेगी,आदि शामिल रहे

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