रिपोर्ट संध्या रावत जिज्ञासु
बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल। पर्वतीय क्षेत्रों में गोलखातों में बिखरी कृषिभूमि को भूमिधरों के व्यक्तिगत खातों में एकत्रित कराने के उद्देश्य से 15 सितंबर 2026 को क्षेत्र पंचायत सभागार, बीरोंखाल में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वैच्छिक एवं आंशिक चकबंदी को लेकर भूमिधरों को प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
बैठक में चकबंदी मंच उत्तराखंड के अध्यक्ष केवला नन्द तेवाड़ी तथा उपाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह बगलाणा को सामाजिक कार्यकर्ताओं अर्जुन सिंह रावत एवं दिनेश रावत द्वारा विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। बैठक में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा बड़ी संख्या में किसान एवं भूमिधर शामिल हुए।
बैठक को संबोधित करते हुए चकबंदी मंच के अध्यक्ष केवला नन्द तेवाड़ी ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भूमिधरों की कृषिभूमि अलग-अलग गोलखातों में बिखरी हुई है। ऐसी भूमि को आपसी सहमति से खेतों के अदल-बदल के माध्यम से व्यक्तिगत खातों में एकत्रित कर व्यवस्थित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा 1 जून 2026 से “स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026” लागू की गई है। इसके तहत जिन गांवों में बड़ी संख्या में भूमिधरों ने चकबंदी के लिए आवेदन किए हैं और ग्रामसभा प्रस्ताव भी पारित हो चुके हैं, वहां प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
तेवाड़ी ने कहा कि चकबंदी की शुरुआत बड़े स्तर पर ही हो, यह आवश्यक नहीं है। यदि दो या दो से अधिक परिवार आपसी सहमति से एक-दो खेतों का अदल-बदल कर थोड़ी भूमि भी एकत्रित करते हैं, तो ऐसी पहल को भी आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने भूमिधरों से आह्वान किया कि “शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन शुरुआत होनी चाहिए।”
इसी क्रम में 7 सितंबर 2026 को चकबंदी मंच के शिष्टमंडल ने आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद, देहरादून से मुलाकात कर ऐसे गांवों में स्वैच्छिक एवं आंशिक चकबंदी की प्रक्रिया को धरातल पर प्रारंभ कराने का अनुरोध किया था।
बैठक का सकारात्मक परिणाम भी सामने आया। मौके पर ही करीब 45 भूमिधरों के ऑनलाइन एवं ऑफलाइन आवेदन भरवाए गए। इन आवेदनों को संबंधित तहसील में प्रस्तुत कर प्राप्ति की रसीद लेने की जिम्मेदारी सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश रावत को दी गई।
मंच ने स्पष्ट किया कि जिन गांवों में अभी 60–70 प्रतिशत भूमिधरों के आवेदन नहीं हो पाए हैं, वहां भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है। यदि दो या दो से अधिक परिवार आपसी सहमति से खेतों का अदल-बदल कर भूमि एकत्रित करते हैं, तो वे भी तत्काल तहसील में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
भूमिधरों की सुविधा के लिए आपसी सहमति से अदल-बदल किए गए खेतों को उनके वास्तविक मालिकों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने के उद्देश्य से एक नया आवेदन-पत्र भी उपलब्ध कराया गया।
बैठक में प्रश्न-उत्तर सत्र भी आयोजित हुआ। इसमें भूमिधरों ने चकबंदी, भूमि अदल-बदल, व्यक्तिगत खातों में भूमि दर्ज कराने तथा आवेदन प्रक्रिया से जुड़े सवाल पूछे, जिनका जवाब चकबंदी मंच के अध्यक्ष केवला नन्द तेवाड़ी एवं उपाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह बगलाणा ने दिया।
ग्वीन मल्ला में भी 25 भूमिधरों ने भरे आवेदन
बैठक से पूर्व बीरोंखाल के निकट स्थित ग्वीन मल्ला गांव के भूमिधरों ने मंच के प्रतिनिधियों को बताया कि उनका गांव वर्ष 2017 में सरकार द्वारा चकबंदी के लिए चयनित किया जा चुका है, लेकिन अभी तक धरातल पर चकबंदी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
ग्रामीणों के आग्रह पर उसी दिन शाम 5 से 6 बजे के बीच ग्वीन मल्ला गांव में ग्रामप्रधान दिनेश रावत की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में करीब 25 भूमिधरों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन आवेदन भरे। साथ ही चकबंदी कार्यकर्ता मनवर सिंह रावत को गांव का चकबंदी मंच समन्वयक मनोनीत किया गया।
बीरोंखाल और ग्वीन मल्ला में हुई बैठकों से यह स्पष्ट हुआ कि पर्वतीय क्षेत्रों के भूमिधर अपनी बिखरी हुई कृषिभूमि को गोलखातों से व्यक्तिगत खातों में एकत्रित कर उसे व्यवस्थित एवं विकसित करने के लिए आगे आने को तैयार हैं।
अब चकबंदी मंच ने संबंधित तहसील अधिकारियों से मांग की है कि स्वैच्छिक चकबंदी के लिए तैयार गांवों के आवेदनकर्ताओं के साथ बैठक कर उनकी खातावार कुल भूमि का विवरण उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद भूमिधरों द्वारा आपसी सहमति से किए गए भूमि अदल-बदल का चरणबद्ध परीक्षण कर स्वैच्छिक प्रयासों को राजस्व विभाग की प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाए, ताकि भूमिधरों की वर्षों पुरानी मांग केवल आवेदन और कागजों तक सीमित न रहे और इसका वास्तविक लाभ पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों एवं भूमिधरों को मिल सके।

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