Home उत्तराखंड पौडी कल्‍जीखाल- वार्षिक पुजन 3 जुन 2026 से होगा ग्राम थापली विकास समिति द्वारा।
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कल्‍जीखाल- वार्षिक पुजन 3 जुन 2026 से होगा ग्राम थापली विकास समिति द्वारा।

रिपोर्ट विक्रम पटवाल

कल्‍जीखाल के जून में भव्य वार्षिक पूजन की जोर शोर से तैयारी। ग्राम थापली, पट्टी कफोलस्यूँ पौड़ी गढ़वाल एक समृद्ध, सांस्कृतिक और संगठित गाँव  में विभिन्न दस जातियों का समावेश रहा है, जो  एकता और सामाजिक विविधता का प्रतीक है। विस्तृत क्षेत्रफल में फैला  यह गाँव तीन प्रमुख तोकों—थापली मल्ली, थापली तल्ली और धारकोट—में विभाजित है, जिनका राजस्व ग्राम एक ही है, ग्राम थापली। समय के साथ सुविधाओं की आवश्यकता के अनुसार लोग अलग-अलग स्थानों पर बसे और इन तोकों का निर्माण हुआ। शिक्षा के क्षेत्र में भी  गाँव अग्रणी रहा है। निकट स्थित जखेटी इंटर कॉलेज में  आसपास की पट्टियों के बच्चे भी शिक्षा ग्रहण करते रहे। गाँव के लोग शिक्षा और संस्कारों में आगे रहे, जिसके परिणामस्वरूप अनेक लोग उच्च पदों पर कार्यरत है।
किन्तु, इसी प्रगति के साथ एक चुनौती भी सामने आई—पलायन। धीरे-धीरे लोग रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में गाँव छोड़ते गए और आज स्थिति यह है कि जहाँ कभी 150–200 परिवार निवास करते थे, वहीं अब प्रत्येक तोक में कुछ ही परिवार शेष रह गए हैं।
यह स्थिति इसी  गाँव की नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ी क्षेत्र की है।  गाँव के जागरूक लोगों ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। आधुनिक समय में सोशल मीडिया के माध्यम से एकजुट होकर गाँव के पुनर्निर्माण की नींव रखी। कुछ परिवार लगभग 125 साल पश्चात अपने पितरों की भूमी से जुड़े और धन्य हुए।
सबसे पहले अपने कुलदेवता श्री भैरवनाथ जी के मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण किया गया, जिसमें लगभग 50 लाख रुपये ग्रामवासियों के सहयोग से एकत्रित किए गए। इसके साथ ही मुख्य सड़क से गाँव तक लगभग 500 मीटर सड़क का निर्माण किया गया, जिससे आवागमन सुगम हुआ।
आज इसका सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है—
* गाँव में नए मकानों का निर्माण हुआ
* लोग वर्ष में 2–3 बार अपने गाँव आने लगे
* मंदिर के कारण गाँव में श्रद्धालुओं का आवागमन बढ़ा
* मां ज्वालपा देवी के दर्शन करने वाले श्रद्धालु अब भैरवनाथ जी के दर्शन के लिए भी हमारे गाँव आते हैं
यह सब संभव हुआ हमारे गाँव के नवयुवकों और वरिष्ठ नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से। समिति का गठन हुआ, हर वर्ष चुनाव प्रक्रिया अपनाई गई और योजनाबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण किए गए।
अब समय है अगले चरण का… जिसमे निर्णय लिया गया की।
?  सभी का कर्तव्य है कि अपने गाँव से जुड़ाव बनाए रखें
? अपने पुराने मकानों का पुनर्निर्माण करें
? वर्ष में कुछ दिन अपने गाँव में अवश्य बिताएँ
? अपनी पुश्तैनी जमीन और विरासत को सुरक्षित रखें
आज पहाड़ों में भूमि पर बाहरी कब्जे का खतरा भी बढ़ रहा है। यदि हम स्वयं अपनी जमीन और गाँव से दूर रहेंगे, तो आने वाले समय में हमें अपनी ही पहचान ढूँढना कठिन हो जाएगा।
यदि गांव के लोग  यह नहीं कहते कि सभी लोग स्थायी रूप से गाँव में बस जाएँ, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियाँ (शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार) अभी सीमित हैं। प्रवासी गांव वाले  चाहते हैं कि—
? हर परिवार अपने गाँव में कम से कम 1–2 कमरे बनाए
? साल में कुछ दिन अपने गाँव में बिताए
? अपने बच्चों को अपनी जड़ों से परिचित कराए
यदि यह प्रयास निरंतर चलता रहा, तो आने वाले 4–5 वर्षों में हमारा थापली गाँव पुनः अपनी पुरानी पहचान और गौरव को प्राप्त कर सकता है।
गांव वालो ने अपने ग्राम वासियों के अलाववा सभी को निमंत्रण भी भेजे है।

सादर निमंत्रण: भैरवनाथ मंदिर की भव्य वार्षिक पूजा ऐवम भंडारा दिनांक 3 और 4 जून 2026 को आयोजित की गई है। आप सब परिवार सहित जुड़कर माँ ज्वालपा और श्री भैरवनाथ जी का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।

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