Home उत्तराखंड देहरादून स्वैच्छिक चकबंदी मॉडल को जमीन पर उतारने की पहल, राजस्व सचिव ने जिलाधिकारियों को दिए निर्देश
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स्वैच्छिक चकबंदी मॉडल को जमीन पर उतारने की पहल, राजस्व सचिव ने जिलाधिकारियों को दिए निर्देश

रिपोर्ट जगमोहन जिज्ञासु

देहरादून/उत्तराखंड। पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षों से बिखरी कृषि भूमि को व्यवस्थित कर वास्तविक भूमिधरों के नाम व्यक्तिगत खातों में दर्ज कराने की दिशा में चकबंदी मंच उत्तराखंड के प्रयासों को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। 7 सितंबर 2026 को मंच के एक शिष्टमंडल ने आयुक्त एवं सचिव राजस्व, उत्तराखंड शासन श्रीमती रंजना राजगुरु से मुलाकात कर स्वैच्छिक चकबंदी मॉडल को धरातल पर लागू करने को लेकर विस्तृत चर्चा की और मांगों से संबंधित अनुरोध-पत्र सौंपा।

मंच ने बताया कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लंबे समय से भूमिधरों की कृषि भूमि अलग-अलग स्थानों पर बिखरी हुई है। ऐसे में गोलखातों से भूमि को निकालकर वास्तविक भूमिधरों के व्यक्तिगत खातों में व्यवस्थित एवं एकत्रित चक बनाने की आवश्यकता है।

चम्पावत और अल्मोड़ा के गांवों में बड़ी संख्या में आवेदन

बैठक में मंच की ओर से बताया गया कि चकबंदी एक्ट/नियमावली 2016/2020 तथा स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026 के अंतर्गत चम्पावत जिले की तहसील पाटी के पोखरी एवं कठोला तथा अल्मोड़ा जिले की रानीखेत तहसील के कुंणकोली गांव में 70 से 80 प्रतिशत से अधिक भूमिधरों द्वारा ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन आवेदन संबंधित तहसीलों में प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

इन गांवों में ग्रामसभाओं द्वारा भी चकबंदी के संबंध में प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं।

मंच ने मांग की कि आवेदनकर्ताओं की खातावार कुल भूमि का विवरण संबंधित तहसीलों द्वारा उपलब्ध कराया जाए, ताकि भूमिधर अपनी आपसी सहमति से उतनी ही भूमि का अदल-बदल कर व्यवस्थित चक तैयार कर सकें।

इसके बाद तहसील प्रशासन के सक्षम अधिकारी निर्धारित समय-सीमा में मौके पर जाकर अदल-बदल के माध्यम से एकत्रित किए गए खेतों का परीक्षण एवं सत्यापन करें और नियमानुसार वास्तविक भूमिधरों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने की कार्रवाई की जाए।

हर माह चरणबद्ध तरीके से हो प्रक्रिया

चकबंदी मंच ने सुझाव दिया कि यह प्रक्रिया चरणबद्ध एवं नियमित रूप से प्रत्येक माह संचालित की जाए, ताकि गांवों से बाहर नौकरी या व्यवसाय करने वाले भूमिधर भी अपनी छुट्टियों के दौरान गांव पहुंचकर आपसी सहमति से अपने खेत व्यवस्थित कर सकें।

साथ ही, जानकारी के अभाव में अब तक आवेदन नहीं कर पाए भूमिधरों को भी आवेदन का अवसर देने की मांग की गई। वहीं जो भूमिधर स्वैच्छिक चकबंदी नहीं चाहते हैं, उनकी भूमि को यथास्थिति में रखने का सुझाव दिया गया।

पहले से व्यवस्थित खेतों के सत्यापन की भी मांग

मंच ने यह भी आग्रह किया कि जिन गांवों अथवा ग्रामसभाओं में दो या दो से अधिक भूमिधरों ने आपसी सहमति से अपने खेतों का अदल-बदल कर उन्हें पहले ही व्यवस्थित कर लिया है, उनका भी मौके पर सत्यापन कर रिकॉर्ड तैयार किया जाए तथा नियमानुसार घेरबाड़ सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने पर जोर

बैठक में चकबंदी मंच द्वारा लंबे समय से स्वैच्छिक चकबंदी के प्रति भूमिधरों को जागरूक करने के लिए किए जा रहे प्रचार-प्रसार, बैठकों और संगोष्ठियों की जानकारी भी दी गई।

मंच ने सरकार से आग्रह किया कि विभागीय अधिकारियों के माध्यम से गांव-गांव जागरूकता कार्यक्रम और संगोष्ठियां आयोजित की जाएं, ताकि अधिक से अधिक भूमिधर स्वैच्छिक चकबंदी की व्यवस्था को समझकर इसका लाभ उठा सकें। इस सुझाव पर राजस्व सचिव ने सकारात्मक सहमति व्यक्त की।

मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने भी दिया सहयोग का आश्वासन

बैठक के दौरान पौड़ी गढ़वाल मंडल के आयुक्त श्री आनंद स्वरूप भी वहां पहुंचे। उन्होंने चकबंदी मंच द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए अभियान में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

सबसे अहम—जिलाधिकारियों को तत्काल निर्देश

बैठक की सबसे महत्वपूर्ण पहल यह रही कि मामला केवल आश्वासन तक सीमित न रहे और इसका परिणाम जमीन पर दिखाई दे, इसके लिए आयुक्त एवं सचिव राजस्व श्रीमती रंजना राजगुरु ने तत्काल चम्पावत के जिलाधिकारी से फोन पर वार्ता की।

अल्मोड़ा के जिलाधिकारी से किसी कारणवश वार्ता नहीं हो सकी, जिसके बाद रानीखेत की संयुक्त मजिस्ट्रेट से फोन पर बातचीत की गई।

दोनों अधिकारियों से वार्ता के माध्यम से आवश्यक निर्देश दिए गए तथा चकबंदी मंच द्वारा तैयार किए गए दोनों जिलों के संबंधित गांवों से दो-दो प्रतिनिधियों को अधिकारियों से तत्काल संपर्क करने को कहा गया।

मंच के उपस्थित सदस्यों ने इस पहल का स्वागत करते हुए आयुक्त एवं सचिव राजस्व के प्रति आभार व्यक्त किया।

शिष्टमंडल में ये सदस्य रहे शामिल

बैठक में चकबंदी मंच के अध्यक्ष श्री के.एन. तिवारी (रानीखेत), उपाध्यक्ष श्री भूपेन्द्र सिंह बगलाना (पौड़ी), श्री कान्ती नौटियाल (उत्तरकाशी), श्री यू.एस. रावत (पौड़ी), श्री परमानन्द जोशी (चम्पावत), श्री उर्वा दत्त पन्त (अल्मोड़ा), श्री सतेन्द्र सिंह रावत (पौड़ी), श्री कुलदीप सिंह बिष्ट (पौड़ी), श्री धर्मेन्द्र जोशी (अल्मोड़ा) तथा श्री मन जुयाल ‘मुसाफ़िर’ (पौड़ी) शामिल रहे।

चकबंदी मंच का कहना है कि उद्देश्य केवल बैठकें करना या आवेदन जमा करना नहीं, बल्कि स्वैच्छिक चकबंदी को वास्तविक रूप से गांव की जमीन पर उतारना है।

दशकों का इंतजार — अब स्वैच्छिक चकबंदी से होगा साकार!

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