Home उत्तराखंड देहरादून रुद्रप्रयाग की जिला पंचायत अध्यक्षा – अमरदेई शाह ने की मुख्यमंत्री जी से मुलाकात
देहरादूनरुद्रप्रयाग

रुद्रप्रयाग की जिला पंचायत अध्यक्षा – अमरदेई शाह ने की मुख्यमंत्री जी से मुलाकात

रिपोर्ट- सत्यपाल नेगी,,, रुद्रप्रयाग
जिले की विभिन्न जन समस्याओ को  लेकर
आज मुख्यमंत्री आवास देहरादून मैं #मा०_जिला_पंचायत_अध्यक्ष_अमरदेई_शाह_जी द्वारा #मा०_मुख्यमंत्री _श्री_त्रिवेन्द्र_सिंह_रावत_जी व मा० राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार #डॉ०धन_सिंह_रावत_जी  से भेंट कर क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया। मा० अध्यक्ष जी द्वारा जखोली पॉलीटेक्निक व आई०टी०आई० को बंद ना करने के संबंध मे मा० मुख्यमंत्री जी से वार्ता की। मा० मुख्यमंत्री जी द्वारा उपरोक्त विषयों सकारात्मक आश्वासन दिया गया। मा० मुख्यमंत्री जी ने रुद्रप्रयाग जनपद मैं कोरोना वायरस संक्रमण की जानकारी ली व रुद्रप्रयाग जनपद मैं शून्य मामले होने पर कोरोना योद्धाओं व ग्राम पंचायत निगरानी समितियों का आभार प्रकट किया।
https://youtu.be/A9HAvZq-n8whttps://youtu.be/A9HAvZq-n8w

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

रुद्रप्रयाग-खतेणा गांव में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर निकाली गई भव्य झांकी, मटकी फोड़ कार्यक्रम ने बांधा समां।

रुद्रप्रयाग। तल्लानागपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत खतेणा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन...

शिक्षा विभाग रुद्रप्रयाग पर पूर्व प्रबंधक समिति ने लगाया मन माने तरीके से कार्य करने के आरोप

रिपोर्ट कमलेश पुरोहित जिला शिक्षा विभाग रुद्रप्रयाग के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा मे...

देवभूमि कार्ड नहीं,सशक्त भू-कानून और मूल निवास का अधिकार चाहिए : उत्तराखण्ड क्रान्ति दल

देहरादून। उत्तराखण्ड में जमीनों की धड़ल्ले से हो रही खरीद-फरोख्त पर विवाद का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया प्रकरणों के सार्वजनिक होने के बाद उत्तराखण्ड क्रान्ति दल एक बार फिर इस गंभीर मुद्दे पर मुखर हो गया है। कचहरी रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में भू-कानून और सरकार के प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ को लेकर पार्टी की महत्वपूर्ण मंथन बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ की अवधारणा, प्रदेश में लगातार हो रही जमीनों की खरीद-फरोख्त तथा मूल निवासियों के अधिकारों से जुड़े गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत, स्पष्ट और प्रभावी भू-कानून की आवश्यकता है। सरकार जिस प्रकार ‘देवभूमि कार्ड’ की व्यवस्था लागू करने की बात कर रही है, वह प्रदेश की मूल समस्या का समाधान नहीं है। इससे उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के संवैधानिक, सामाजिक और भूमि संबंधी अधिकारों को वह संरक्षण नहीं मिलेगा जिसकी आज आवश्यकता है। उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बाहरी व्यक्तियों एवं प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से खुलेआम जमीन खरीदने और बेचने के विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं। यह स्थिति उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान, जनसांख्यिकीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। टोडरिया ने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के बजाय राज्य सरकार उदासीन रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पौड़ी जिले के सबदरखाल में 144 नाली जमीन बिकने का मामला सामने आया है, उससे स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड सरकार का भू-कानून जमीनों की बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भू-कानून भी भू माफियाओं के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया प्रतीत होता है। टोडरिया ने उत्तराखण्ड सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही प्रदेश में जमीनों की इस बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक नहीं लगाई गई तो आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तराखण्ड क्रान्ति दल गांव-गांव जाकर सरकार की इस हिमालय विरोधी सोच और उसकी भू-कानून नीति की पोल जनता के सामने खोलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की जमीन को बाजार बनने नहीं दिया जाएगा और इस लड़ाई को निर्णायक स्तर तक ले जाया जाएगा। केंद्रीय महामंत्री सेवानिवृत्त कर्नल देवरानी ने कहा कि जहां प्रदेश की जनता उत्तराखण्ड सरकार से मूल निवास प्रमाण-पत्र की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार ‘देवभूमि कार्ड’ बनाकर 15 साल के निवास के आधार पर निवास प्रमाण-पत्र देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह प्रदेश के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा करना चाहती है या बाहरी लोगों के लिए स्थायी बसावट का रास्ता आसान करना चाहती है।...