रिपोर्ट दीपक मैठाणी
संयुक्त नागरिक संगठन ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री समेत शासन के आला अधिकारियों को भेजा ज्ञापन
देहरादून। प्रस्तावित “उत्तराखंड भूमि अतिक्रमण (निषेध) अध्यादेश-2026” को आगामी कैबिनेट बैठक में लाकर तत्काल लागू कराने की मांग को लेकर संयुक्त नागरिक संगठन ने शासन को ज्ञापन भेजा। संगठन की ओर से राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, सचिव आवास, सचिव राजस्व और एमडीडीए को ज्ञापन प्रेषित किए गए। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से मुलाकात कर भी इस गंभीर विषय पर कार्रवाई की मांग रखी। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल सचिवालय स्थित संबंधित विभागों के कार्यालयों में भी पहुंचा।
ज्ञापन में कहा गया कि राज्य में सरकारी एवं निजी भूमि पर भू-माफियाओं द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण और अवैध कब्जों को हटाने के लिए पुलिस एवं प्रशासन द्वारा पिछले वर्षों में किए गए अधिकांश प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके हैं। ऐसे में प्रस्तावित अध्यादेश के लागू होने से पीड़ित लोगों को राहत मिलने और अवैध कब्जों पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद है।
संगठन के अनुसार प्रस्तावित कानून में नए एवं पुराने अवैध कब्जों के मामलों में आरोपियों के विरुद्ध भारी जुर्माने के साथ 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
ज्ञापन में संगठन ने कहा कि प्रदेश में लगातार सामने आ रहे भूमि अतिक्रमण और अवैध कब्जों के मामलों से ऐसा प्रतीत होता है कि भू-माफियाओं में कानून का पर्याप्त भय नहीं है। संगठन ने यह भी कहा कि आम लोगों के बीच यह चर्चा है कि कुछ भू-माफिया धनबल एवं राजनीतिक संपर्कों के सहारे प्रभावशाली स्थिति में पहुंच गए हैं। हालांकि,इन दावों की जांच और तथ्यात्मक पुष्टि संबंधित सक्षम एजेंसियों द्वारा की जानी चाहिए।
संगठन ने आशंका व्यक्त की कि कहीं प्रस्तावित अध्यादेश को लागू होने से रोकने के लिए प्रभावशाली तत्व अपने संसाधनों का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया कि हाल में दो कैबिनेट बैठकें होने के बावजूद अध्यादेश को कैबिनेट के समक्ष लाकर पारित नहीं कराया जाना चिंता का विषय है।
संयुक्त नागरिक संगठन ने सरकार से मांग की कि आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्तावित “उत्तराखंड भूमि अतिक्रमण (निषेध) अध्यादेश-2026” को प्राथमिकता के साथ पटल पर लाकर पारित किया जाए और उसे तत्काल प्रभाव से लागू करने की कार्रवाई की जाए, ताकि प्रदेश में सरकारी एवं निजी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
प्रतिनिधिमंडल में गिरीश चंद्र भट्ट, ठाकुर शेरसिंह, उमेश्वर सिंह रावत, सुशील त्यागी, प्रदीप कुकरेती और उमेश सक्सेना शामिल रहे

Leave a comment