लोनी, गाजियाबाद, 17 अगस्त 2026।अलकनंदा कॉलोनी, इलायचीपुर, रामपार्क विस्तार, लोनी में संचालित गढ़वाली एवं कुमाऊँनी लोक-भाषा शिक्षण कक्षाओं का 12 सप्ताह का अभियान 15 अगस्त 2026 को सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। समापन अवसर पर 48 बच्चों ने उत्साह के साथ भाग लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम, पुरस्कार वितरण और जलपान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
इस अभियान की घोषणा 5 जुलाई को उत्तरांचल सांस्कृतिक भ्रातृ समिति द्वारा आयोजित मेधावी छात्र उत्कृष्ट सम्मान समारोह में की गई थी। कार्यक्रम में साहित्य लोकभाषा मंच दिल्ली के संरक्षक एवं DPMI दिल्ली के चेयरमैन डॉ. विनोद बछेती जी ने लोकभाषा को हमारी संस्कृति, परंपरा और पहचान का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए इस पहल की सराहना की।
समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिवकुमार जी, नेहा जी, एडवोकेट दिनेश शर्मा जी एवं किशोर सती जी सहित बच्चों के अभिभावक एवं सहयोगी उपस्थित रहे।
गढ़वाली शिक्षिकाएँ हीरा पटवाल जी एवं सरिता रावत जी तथा कुमाऊँनी शिक्षिकाएँ नीमा रावत जी एवं कविता तिवारी जी ने बच्चों को पूरी मेहनत और लगन से लोकभाषा सिखाई। केंद्र प्रमुख मंजू उनियाल जी, सह-केंद्र प्रमुख पुष्पा सती जी एवं सहयोगी कार्यकर्ताओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
मीडिया प्रभारी जयेंद्र नेगी ने कहा, “बच्चों को अपनी मातृभाषा से जोड़ना हमारी संस्कृति को आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है। यह प्रयास आगे भी जारी रहना चाहिए।”
सह-मीडिया प्रभारी संगीता भट्ट जी ने सूचना, समन्वय एवं प्रचार-प्रसार में सहयोग दिया। जलपान की व्यवस्था संगीता भट्ट जी एवं रमेश सती जी के सहयोग से की गई।
अभियान की सफलता पर डॉ. विनोद बछेती जी, शिक्षिकाओं, बच्चों, अभिभावकों, सहयोगी कार्यकर्ताओं एवं उत्तरांचल सांस्कृतिक भ्रातृ समिति के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया गया।
यह अभियान बच्चों को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और उत्तराखंडी पहचान से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास रहा।
बोली बचेगी, तो हमारी पहचान बचेगी

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