रिपोर्ट प्रभुपाल सिंह रावत
द्वारी-भौन सड़क मार्ग पर माल वाहन (,पिक अप) 200 मीटर पहाड़ी से नीचे खाई में गिरा, चालक व हेल्पर ने कूदकर बचायी जान।
आज दोपहर रिखणीखाल प्रखंड के द्वारी-भौन सड़क मार्ग पर स्थित द्वारी-क्वीराली सड़क जंक्शन पर पहाड़ी से माल वाहन (पिक अप) 200 मीटर खाई में ग्राम गले गाँव की तरफ गिर गया।
यह माल वाहन कोटद्वार से चलकर द्वारी क्षेत्र के दुकानदारों को खाद्य सामाग्री लेकर वितरित करने आ रहा था।गाडी में सवार चालक व हेल्पर ने चलते वाहन से कूदकर जान बचायी।वाहन के तो परखच्चे उड़ गये।इंजन बुरी तरह नुकसान हो गया। वाहन में रखा खाद्य सामाग्री भी बुरी तरह मिट्टी पत्थर आदि से फटकर बर्बाद हो गई है।किसी तरह लोगों ने बचा खुचा सामान इकठ्ठा किया।
सड़क की हालत बहुत ही जीर्ण शीर्ण है।बद से बदतर हो रखी है।इसका डामरीकरण, चौड़ीकरण आदि 12- 13 सालों से नहीं हुआ है। झाड़ी भी इस कदर उगी है कि सड़क की चौड़ाई भी कम होकर सड़क प्रभावित हुई है।
क्षेत्रीय जनता व सामाजिक कार्यकर्ता कई बार लोक निर्माण विभाग लैंसडौन को शिकायत कर चुके हैं लेकिन सिर्फ लॉलीपॉप ही मिलता है।कुछ न कुछ बहाना बन जाता है।कोई भी वाहन चालक इस सड़क पर वाहन चलाने को तैयार नहीं है।चाहे यात्री बस सेवा हो या अन्य वाहन। वाहन चालक यात्री ढोने को कतराते हैं।
ऐसा लगता है इस क्षेत्र में कोई जनप्रतिनिधि नहीं है जिसकी आवाज प्रशासन तक पहुंचे, न स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि वे भी निष्क्रिय नजर आते हैं। तभी इस सड़क की दयनीय हालत बनी हुई है।कई बार तो इस्टीमेट भी वापस आ रहे हैं। इसमें क्षेत्रीय जनता भी बराबर दोषी है।जो जागरूक नहीं हैं। ये सड़क लगभग 25 वर्ष हो गये लेकिन इस पर अभी सुचारू यातायात सुलभ व चालू नहीं है।इस क्षेत्र के लिए कलंक साबित हो रही है।ये इलाका तो आदिवासी क्षेत्र घोषित होना चाहिए। जहाँ अभी तक यातायात की असुविधा से लोग जूझ रहे हैं।
शासन प्रशासन को इस सड़क का संज्ञान लेने की सख्त आवश्यकता है
आज दोपहर रिखणीखाल प्रखंड के द्वारी-भौन सड़क मार्ग पर स्थित द्वारी-क्वीराली सड़क जंक्शन पर पहाड़ी से माल वाहन (पिक अप) 200 मीटर खाई में ग्राम गले गाँव की तरफ गिर गया।
यह माल वाहन कोटद्वार से चलकर द्वारी क्षेत्र के दुकानदारों को खाद्य सामाग्री लेकर वितरित करने आ रहा था।गाडी में सवार चालक व हेल्पर ने चलते वाहन से कूदकर जान बचायी।वाहन के तो परखच्चे उड़ गये।इंजन बुरी तरह नुकसान हो गया। वाहन में रखा खाद्य सामाग्री भी बुरी तरह मिट्टी पत्थर आदि से फटकर बर्बाद हो गई है।किसी तरह लोगों ने बचा खुचा सामान इकठ्ठा किया।
सड़क की हालत बहुत ही जीर्ण शीर्ण है।बद से बदतर हो रखी है।इसका डामरीकरण, चौड़ीकरण आदि 12- 13 सालों से नहीं हुआ है। झाड़ी भी इस कदर उगी है कि सड़क की चौड़ाई भी कम होकर सड़क प्रभावित हुई है।
क्षेत्रीय जनता व सामाजिक कार्यकर्ता कई बार लोक निर्माण विभाग लैंसडौन को शिकायत कर चुके हैं लेकिन सिर्फ लॉलीपॉप ही मिलता है।कुछ न कुछ बहाना बन जाता है।कोई भी वाहन चालक इस सड़क पर वाहन चलाने को तैयार नहीं है।चाहे यात्री बस सेवा हो या अन्य वाहन। वाहन चालक यात्री ढोने को कतराते हैं।
ऐसा लगता है इस क्षेत्र में कोई जनप्रतिनिधि नहीं है जिसकी आवाज प्रशासन तक पहुंचे, न स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि वे भी निष्क्रिय नजर आते हैं। तभी इस सड़क की दयनीय हालत बनी हुई है।कई बार तो इस्टीमेट भी वापस आ रहे हैं। इसमें क्षेत्रीय जनता भी बराबर दोषी है।जो जागरूक नहीं हैं। ये सड़क लगभग 25 वर्ष हो गये लेकिन इस पर अभी सुचारू यातायात सुलभ व चालू नहीं है।इस क्षेत्र के लिए कलंक साबित हो रही है।ये इलाका तो आदिवासी क्षेत्र घोषित होना चाहिए। जहाँ अभी तक यातायात की असुविधा से लोग जूझ रहे हैं।शासन प्रशासन को इस सड़क का संज्ञान लेने की सख्त आवश्यकता है

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