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देहरादून-विश्व उपभोक्ता दिवस पर संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

विश्व उपभोक्ता दिवस के अवसर पर संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों, कर्तव्यों तथा सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं के चयन के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों, समाजसेवियों तथा जागरूक नागरिकों ने भाग लिया और उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के डिप्टी ड्रग कंट्रोलर थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राज्य का औषधि नियंत्रण विभाग हमेशा उत्तराखंड के नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाज़ार में उपलब्ध दवाइयाँ और स्वास्थ्य से जुड़ी वस्तुएँ निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और आम नागरिक तक सुरक्षित रूप में पहुँचें। उन्होंने कहा कि औषधि नियंत्रण विभाग नियमित रूप से दवा निर्माण इकाइयों, मेडिकल स्टोर्स तथा औषधि वितरण केंद्रों की निगरानी करता है, ताकि किसी भी प्रकार की मिलावट, नकली दवाओं या निम्न गुणवत्ता वाली दवाओं को बाज़ार में आने से रोका जा सके।मुख्य अतिथि ने यह भी कहा कि आज के समय में उपभोक्ताओं को भी जागरूक और सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी दवा को खरीदते समय उसकी एक्सपायरी डेट, बैच नंबर, निर्माता कंपनी तथा लाइसेंस की जानकारी अवश्य देखें। यदि किसी भी प्रकार की संदिग्ध दवा या उत्पाद दिखाई दे, तो तुरंत संबंधित विभाग को सूचित करें। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों की भागीदारी से ही उपभोक्ता संरक्षण की व्यवस्था मजबूत हो सकती है।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता तथा SPECS (सोसाइटी फॉर पब्लिक एंड एनवायरनमेंटल कंसर्न फॉर साइंस) के अध्यक्ष डॉ. बृज मोहन शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में मिलावट उपभोक्ताओं के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार खाद्य पदार्थों, दूध, मसालों, तेल, मिठाइयों और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं में मिलावट की घटनाएँ बढ़ रही हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।डॉ. शर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं को जागरूक बनाकर ही मिलावट की इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने आम लोगों को कुछ सरल उपाय भी बताए जिनकी सहायता से घर पर ही कई खाद्य पदार्थों की शुद्धता की प्रारंभिक जांच की जा सकती है। उन्होंने बताया कि दूध, घी, मसाले और अन्य खाद्य वस्तुओं में मिलावट की पहचान के लिए सरल घरेलू परीक्षण भी संभव हैं, जिनके बारे में जागरूकता फैलाना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को हमेशा विश्वसनीय स्थानों से ही खाद्य पदार्थ और अन्य वस्तुएँ खरीदनी चाहिए तथा पैक्ड वस्तुओं पर अंकित जानकारी को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जागरूकता बढ़ाने से ही मिलावट और धोखाधड़ी की घटनाओं को रोका जा सकता हैकार्यक्रम में रेडक्रॉस सोसाइटी के मोहन खत्री ने विश्व उपभोक्ता दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बताया कि विश्व उपभोक्ता दिवस हर वर्ष 15 मार्च को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा तथा उनके हितों को सुरक्षित करना है।राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदीप कुकरेती ने कहा कि आज के दौर में जब बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और नई-नई वस्तुएँ उपभोक्ताओं तक पहुँच रही हैं, तब उपभोक्ताओं को अधिक सतर्क और जागरूक होने की आवश्यकता है। दून रेजिडेंट वेलफेयर फ्रंट के देवेंद्रपाल मोंटी का विचार था कि उपभोक्ता को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक होना चाहिए। सही जानकारी, सावधानी और जागरूकता के माध्यम से ही एक सुरक्षित और पारदर्शी उपभोक्ता व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है।
स्पेक्स के हरी राज सिंह ने पोषण के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में लोग अक्सर संतुलित और पौष्टिक आहार की उपेक्षा कर देते हैं, जिसका सीधा प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर की ऊर्जा, प्रतिरोधक क्षमता और समग्र स्वास्थ्य का आधार है।उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने दैनिक आहार में ताजे फल, सब्जियाँ, अंकुरित अनाज और संतुलित भोजन को शामिल करें। उन्होंने यह भी बताया कि अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और कृत्रिम रसायनों से युक्त वस्तुओं का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों के चयन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। दून सिटीजन फोरम के जगमोहन मेहंदीरता ने उपभोक्ता जागरूकता और नागरिक कर्तव्यों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की समझ भी उतनी ही आवश्यक है। यदि उपभोक्ता स्वयं जागरूक होंगे और गलत उत्पादों या सेवाओं के विरुद्ध आवाज़ उठाएंगे, तभी व्यवस्था में सुधार संभव है। संयुक्त नागरिक संगठन के दिनेश भंडारी का विचार था की समाज में जागरूकता का वातावरण बनाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों के प्रति सजग रहे और गलत प्रथाओं के विरुद्ध संगठित रूप से खड़ा हो सके। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे उपभोक्ता जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
रोड सेफ्टी अभियान के उमेश्वर रावत ने उपस्थित नागरिकों से हमेशा सतर्क और जागरूक रहने का आह्वान किया। पूर्व शिक्षा निदेशक एम एस बिष्ट,पर्यावरणविद जगदीश बावला ने कहा कि आज के समय में सूचना और तकनीक के विस्तार के बावजूद कई बार लोग जागरूकता के अभाव में गलत उत्पादों या सेवाओं का शिकार हो जाते हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम सभी समय-समय पर आयोजित होने वाले ऐसे कार्यक्रमों से जानकारी प्राप्त करें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।आंदोलनकारी पूरनसिंह लिंगवाल,स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के सत्य प्रकाश चौहान, उपभोक्ता जागरूकता केवल एक दिन का विषय नहीं है, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है। जब तक समाज के प्रत्येक व्यक्ति में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित नहीं होगी, तब तक उपभोक्ता सुरक्षा की व्यवस्था पूर्ण रूप से प्रभावी नहीं हो सकती। विशेष:इस अवसर पर स्पेक्स के बृज मोहन शर्मा तथा मुख्य अतिथि सहायक आयुक्त फूड सेफ्टी सुधीर कुमार को वेस्ट वारियर्स संस्था के नवीन कुमार सडाना तथा समाजसेवी ताराचंद गुप्ता ने अंगवस्त्र पहनाकर इनको सम्मानित भी किया।
प्रेषक प्रदीप कुकरेती सुशील त्यागी संयुक्त नागरिक संगठन

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