Home उत्तराखंड पौडी समाजसेवी एंव समग्र विकास समिति के मागदर्शक ज्ञान देव जी दुनिया मे नही रहे।
पौडी

समाजसेवी एंव समग्र विकास समिति के मागदर्शक ज्ञान देव जी दुनिया मे नही रहे।

बड़े दुःख के साथ सूचित किया जाता है कि समग्र ग्राम विकास समिति के मार्गदर्शक हमारे बहुत ही पूजनीय श्री ज्ञान देव घनसाली जी अब इस दुनिया में नहीं रहे जो कि कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे जो हाल में पीरुमदारा रामनगर में रहते थे इनका पटियाला में गढ़वाल समाज के लिए बहुत ही बड़ा योगदान रहा है!  श्री ज्ञानदेव जी बीरोंखाल विकास खंड के घनस्याली ग्राम सभा के थे। उनका  नैनीडांडा जन युवा मोर्चा, आदि कई सामाजिक संगठनों में कर्मठ सामाज सेवी थे ,इस अपूर्णीय क्षति की पूर्ति नहीं हो सकती, और गढ़वाल ने एक सच्चा समाज सेवी खो दिया है,समग्र ग्राम विकास समिति की तरफ से उनको शत-शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि, भगवान पुण्य आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें और परिवार को असहनीय दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें ओम शांति ओम कई संस्‍थाओ ने  और  रिंगल्टा समग्र ग्राम विकास समिति ने उनके निधन पर शौक प्रकट किया है।

बिजेंद्र सिंह रावत “दगड़या” द्वारा उनको समर्पित 

आपका यूं चले जाना बहुत दर्द दे गया
मेरे प्रिय दोस्त , मेरे सामाजिक गुरु और आदर्श ज्ञान देव घनस्याली जी का यूं चले जाना , मेरे लिए एक वयक्तिगत हानि हैं। समाज सेवा में ऐसे निस्वार्थी इंसान अभी तक बहुत कम दिखे है। उनसे पहली मुलाकात सन 2002 में घनौली के एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हुई। पहली मुलाकात ही अविस्मरणीय थी और मुझे लगा की इस इंसान के अंदर अपने समाज के प्रति निस्वार्थ प्रेम कूट कूट कर भरा हैं,और इनके साथ मिल कर समाज को एक नई दिशा दी जा सकती है। ज्ञान देव जी पंजाब राज्य बिजली बोर्ड पटियाला में कार्यरत थे। बिजली बोर्ड से सेवानिर्वत होने के बाद विगत 12 वर्षों से वो रामनगर रह रहे थे।पटियाला शहर में इनका नाम भी प्रमुख समाज सेवियों में आता था। हिलांस कला सांस्कृतिक कला मंच के मुख्य संस्थापक थे। इस मंच ने अभी अपनी सिल्वर जुबली बनाई। इनका सबसे बड़ा गुण था किसी भी कामयाब पहाड़ी आदमी को अपने समाज के साथ जोड़ना और उनकी सफलता से समाज को कुछ सिखाना। क्षेत्रवाद की भावना उनसे कोसो दूर थी।
मैने अपने 30 वर्षों के सामाजिक क्षेत्र में ऐसा इंसान नही देखा जो समाज की तरक्की के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दे। जब कभी उनके पास रात को रुकता तो रात को 10 बजे हमारी बातें शुरू होती तो सुबह 6 बजे तक चलती। वो नेता नही थे परंतु पटियाला शहर की राजनीति में अन्य समाज के लोग उन्हे जानते थे, वो साहित्यकार नही थे परंतु अधिकतर साहित्यकार उन्हे जानते थे, वो रंगमंच के कलाकार नही थे परंतु अधिकतर कलाकार और लोक गायक उन्हे जानते थे, वो सभाओं के प्रधान/महासचिव कम रहे परंतु पंजाब की अधिकतर सभाओं के प्रधान/ सचिव उन्हे जानते थे, वो उत्तराखंड में किसी पार्टी के सदस्य नहीं थे परंतु हर पार्टी के अधिकतर लोग उनको जानते थे, वो खुद लेखक नही थे परंतु हिलांस मंच के द्वारा प्रति वर्ष एक स्मारिका निकालते रहते थे। ऐसे बहुआयामी, बहुमुखी गुणों के इंसान थे। पटियाला के पहाड़ी भाई तो उन्हे सदैव याद करते रहेंगे। अगर सामाजिक क्षेत्र में पटियाला शहर का नाम देश के विभिन्न प्रांतों में आया है तो वो ज्ञान देव जी के कारण ही।
विगत कुछ महीनो से बीमार चल रहे थे और दिल्ली में इलाज भी चल रहा था। उनके बेटे से निरंतर संपर्क में था । उनका बेटा हमेशा बोलता था की वो आपको याद करते रहते है। 20 फरवरी 2025 को अस्पताल से डिस्चार्ज होकर जब वो काशीपुर को निकल रहे थे तब भी उनके बेटे ने कहा की पापा बोल रहे है की मिलने जरूर आना काशीपुर, और मैने वादा भी किया और कहा की जरूर आऊंगा । पर आज उनकी खबर सुन कर दिल बैठ गया। उनका बेटा आज भी बोल रहा था मेरे को और धीरज भाई को याद करते थे।
अब लगा की एक सामाजिक आदमी को समाज के आदमी का मिलना जुलना कितना जरूरी है।
मैं तो यही कहूंगा की दोस्त तुम जहां भी रहो खुश रहो और तुम्हारे बताए गए रास्तों पर अपने समाज को सदैव आगे ले जाने का प्रयास करेंगे। जब कभी भी निराशा होती थी तो आप मेरे लिए एक शक्ति पुंज बन कर आते थे। आप मेरे लिए सदैव प्रेरणादायक थे। आपके साथ बिताए कई अविस्मरणीय पल है , वही अब मेरे पास हैं। पंजाब के अतिरिक्त अन्य कई शहरों में आपके संग यात्राएं की जैसी भोपाल, इंदौर, कोटद्वार, हरिद्वार, जोधपुर, भिवानी, देहरादून, रुड़की, सहारनपुर , गुड़गांव, दिल्ली आदि शहरों में।
अगर लोग पटियाला में मुझे आज “दगड़या” के नाम से जानते है तो उसका पूरा श्रेय आपको है भ्राता श्री। आप मेरे और मेरे परिवार के दिलों में सदैव जीवित रहोगे।
नम आंखों से आपको श्रद्धांजलि। जब तक समाज में आना जाना रहेगा आपको अपना आदर्श मान कर ही चलता रहूंगा।

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