Home उत्तराखंड देहरादून जौलीग्रांट मैं पोषण अभियान के अंतर्गत कार्यक्रम का आयोजन किया गया
देहरादून

जौलीग्रांट मैं पोषण अभियान के अंतर्गत कार्यक्रम का आयोजन किया गया

रिपोर्ट  प्रताप सिंह नेगी

आज सेक्टर जौलीग्रांट मैं पोषण अभियान के अंतर्गत कार्यक्रम का आयोजन किया गया,जिसमें मुख्य आकर्षण उत्तराखंड के व्यंजन,अंकुरित दाल, वा किचन गार्डन की प्रदर्शनी सजाई गई मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष ( प्रतिनिधि) सागर kमनवाल ,बाल विकास विभाग के सुपरवाइजर,कालूवाला ग्राम प्रधान पंकज रावत, आदि उपस्थित थे,अतिथियों का स्वागत जोर दार बैंड बाजे ,तिलक अभिनंदन के साथ किया गया,कार्यकर्म का संचालन कर रही सुनीता राणा ने बताया कि पोषण माह भारत सरकार द्वारा चलाया गया एक अभियान है ,जो 1 से 30 सितंबर तक हर आंगनबाड़ी केंद्रों पर मनाया जाता है,जिसके तहत घर का सुध भोजन करके ही हम खुद को कुपोषित होने रोक सकते है,मुख्य अतिथि,सागर मनवाल जी ने कहा कि आंगनबाड़ी द्वारा इस कार्यकर्म को बखूबी चलाया जा रहा है,और जन जन तक इसका संदेश पहुंच भी रहा है,सेक्टर सुपरवाइजर अनिता पटवाल ने आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से दी जाने वाली समस्त योजनाओं के विषय मैं विस्तार से बताया,कार्यकर्म मैं बेटी बचाओ,पोषण,और अम्मा की रसोई से संबंधित सुंदर नृत्य,नाटक प्रस्तुत किए गए,जिन्होंने अतिथियों,और दर्शकों का मन मोह लिया,कार्यकर्म मैं अजीम प्रेम जी फाउंडेशन से अर्चना जी,रीना जी, एएनएम महा देवी,डॉक्टर शालू भट्ट,विनीत,राकेश धोभाल,रीना चौहान,ऋतु,मीना, राधा,लक्ष्मी कोठियाल किरन,रजनी ,रजनी रावत, उषा,सरोज,शांति, गीता ,उषा , आदि उपस्थित थे

अन्‍य खबरो के लिए नीचे लिंक पर जाए। 

युटयुब चैनलhttps://www.youtube.com/channel/UCVCkmiPBWlGDz-Vyi8c2Xlg

फेसबुक पेजhttps://www.facebook.com/Voicemountains

व्‍हाटअपhttps://chat.whatsapp.com/KX9oESnS9NHE5fGoUMwOs

Contact- jagjigyasu@gmail.com  8851979611

Related Articles

देवभूमि कार्ड नहीं,सशक्त भू-कानून और मूल निवास का अधिकार चाहिए : उत्तराखण्ड क्रान्ति दल

देहरादून। उत्तराखण्ड में जमीनों की धड़ल्ले से हो रही खरीद-फरोख्त पर विवाद का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया प्रकरणों के सार्वजनिक होने के बाद उत्तराखण्ड क्रान्ति दल एक बार फिर इस गंभीर मुद्दे पर मुखर हो गया है। कचहरी रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में भू-कानून और सरकार के प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ को लेकर पार्टी की महत्वपूर्ण मंथन बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ की अवधारणा, प्रदेश में लगातार हो रही जमीनों की खरीद-फरोख्त तथा मूल निवासियों के अधिकारों से जुड़े गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत, स्पष्ट और प्रभावी भू-कानून की आवश्यकता है। सरकार जिस प्रकार ‘देवभूमि कार्ड’ की व्यवस्था लागू करने की बात कर रही है, वह प्रदेश की मूल समस्या का समाधान नहीं है। इससे उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के संवैधानिक, सामाजिक और भूमि संबंधी अधिकारों को वह संरक्षण नहीं मिलेगा जिसकी आज आवश्यकता है। उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बाहरी व्यक्तियों एवं प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से खुलेआम जमीन खरीदने और बेचने के विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं। यह स्थिति उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान, जनसांख्यिकीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। टोडरिया ने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के बजाय राज्य सरकार उदासीन रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पौड़ी जिले के सबदरखाल में 144 नाली जमीन बिकने का मामला सामने आया है, उससे स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड सरकार का भू-कानून जमीनों की बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भू-कानून भी भू माफियाओं के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया प्रतीत होता है। टोडरिया ने उत्तराखण्ड सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही प्रदेश में जमीनों की इस बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक नहीं लगाई गई तो आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तराखण्ड क्रान्ति दल गांव-गांव जाकर सरकार की इस हिमालय विरोधी सोच और उसकी भू-कानून नीति की पोल जनता के सामने खोलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की जमीन को बाजार बनने नहीं दिया जाएगा और इस लड़ाई को निर्णायक स्तर तक ले जाया जाएगा। केंद्रीय महामंत्री सेवानिवृत्त कर्नल देवरानी ने कहा कि जहां प्रदेश की जनता उत्तराखण्ड सरकार से मूल निवास प्रमाण-पत्र की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार ‘देवभूमि कार्ड’ बनाकर 15 साल के निवास के आधार पर निवास प्रमाण-पत्र देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह प्रदेश के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा करना चाहती है या बाहरी लोगों के लिए स्थायी बसावट का रास्ता आसान करना चाहती है।...

दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में “क्लाइमेट चेंज – बच्चों की नजर से” कार्यक्रम का सफल आयोजन।

रिपोर्ट विक्रम पटवाल देहरादून मे अब गौरय्या कम दिखती है लाल बासमती...

देहरादून- उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रदेश कमेटी की बैठक।

आज दिनांक 20 जुलाई 2026 को उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की...