Home उत्तराखंड देहरादून देहरादून रिखणीखाल विकास समिति की आगामी वार्षिकोत्सव व स्थापना दिवस की तैयारी ।
देहरादून

देहरादून रिखणीखाल विकास समिति की आगामी वार्षिकोत्सव व स्थापना दिवस की तैयारी ।

रिपोर्ट प्रभुपाल सिंह रावत

देहरादून रिखणीखाल विकास समिति की कार्यकारिणी की बैठक दिनांक 15 सितम्बर, 2024 को बिग वे रेस्टोरेंट, गढी कैंट देहरादून मेें श्रीमती कल्पना बिष्ट, उपाध्यक्ष दे रि वि समिति के आवास व रेस्टोरेंट में आयोजित हुई।

बैठक में वार्षिकोत्सव की सम्भावित तिथि 22 दिसम्बर, 2024 रविवार मानी गई है।किसी अपरिहार्य कारणों से तिथि में परिवर्तन किया जा सकता है।जिसमें कार्यक्रम का स्थान जे पी प्लाजा, कारगी चौक देहरादून को ही प्राथमिकता दी गई है।इसमें कुछ उतरदायित्व व जिम्मेदारियां दी गई हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए सांस्कृतिक सचिव अमित जखमोला,रूप सिंह रावत, पुष्पा रावत, उर्मिला रावत हैं। मंच संचालन धर्मेन्द्र सिंह नेगी, रश्मि नेगी,क्रीडा प्रतियोगिता में सतेन्दर सिंह रावत, राजेन्द्र सिंह रावत, रूप सिंह रावत। सम्पूर्ण उतरदायित्व मेजर श्याम सिंह गुसांई, ओम प्रकाश जोशी,जयपाल सिंह रावत, योगेन्द्र सिंह नेगी।चिकित्सकीय स्वास्थ्य शिविर ब्रिगेडियर यशवंत सिंह बिष्ट, प्रकाश रावत (वैलमेड अस्पताल)।मुख्य अतिथि आमंत्रण के लिए शैलेन्द्र सिंह बिष्ट ‘गढवाली’।विद्युत व साउंड महिपाल सिंह, साज सज्जा के लिए रूप सिंह रावत, लीला सिंह रावत, कल्पना बिष्ट। मीडिया प्रचार प्रसार के लिए प्रभुपाल सिंह रावत, चन्द्र मोहन जदली, शिव प्रसाद मैंदोला। भोजन व्यवस्था पूरण सिंह नेगी,विक्रम सिंह पटवाल, पान सिंह नेगी आदि को दी गई है।समयानुसार अन्य उपस्थित लोगों को मौके पर ही जिम्मेदारी दी जायेगी।

इस बार समिति में शैलेन्द्र सिंह बिष्ट ‘गढवाली’जी ने देहरादून रिखणीखाल विकास समिति की आजीवन सदस्यता ग्रहण की है।वे रिखणीखाल के धयड गाँव के निवासी हैं। उन्होनें अपने संक्षिप्त परिचय देकर भावुक इशारों में बोले कि मुझे आज बहुत प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है कि मैं आज अपने मूल जड़ में सम्मिलित होकर व अपने बीच पाकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उनका परिचय बहुत ही ममतामयी रहा।वे कहते हैं कि समिति के लिए मुझसे जो भी बन पड़ेगा, हर समय तत्पर रहूँगा,व सहयोग करूंगा। उनके बोलने से साफ झलक रहा था कि वे अपने गाँव व आसपास के गाँव के लोगों के बीच खड़े हैं।

इसके बाद नम्बर आया,रिखणीखाल के गाँव चुरानी निवासी शैलेन्द्र सिंह नेगी,पी सी एस,जो कई तहसीलों में उप जिलाधिकारी रह चुके हैं, वर्तमान में वे नगर आयुक्त ऋषिकेश मेें हैं। वे भी अध्यापक जीवन से निकल कर सन 2014 में प्रशासनिक सेवा में आये हैं, अपने समय के पी सी एस टॉपर रहे हैं। उनकी काम करने की कार्यशैली अलग ही है।वे समिति के स्थापना से जुड़े हैं। उनका कहना था कि मैनें महसूस किया है कि उत्तराखण्ड में संचालित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने वाले अभ्यर्थियों में रिखणीखाल की गिनती नगण्य है।उन्होने सलाह दी है कि अभ्यर्थी को शुरू से ही कोचिंग आदि की व्यवस्था करनी चाहिए। अन्य क्षेत्रों के अभ्यर्थी तीन तीन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होते हैं, लेकिन रिखणीखाल मेें ऐसा देखने को नहीं मिलता।ये मार्गदर्शन का अभाव है।

उन्होने एक बात और कही कि वॉलीबाल खेल रिखणीखाल का प्रमुख खेल रहा है,ये 70-80 के दशक से चल रहा है।चाहे स्कूल कॉलेज व सेना हो।रिखणीखाल का बोलबाला रहा है।उनका सुझाव था कि देहरादून मेें भी रिखणीखाल के खिलाडियों का वॉलीबाल प्रतियोगिता आयोजित हो,उसके लिए जो भी व्यय आदि हो वे स्वयं वहन करेगें। स्थान का भी प्रबन्ध स्वयं अपने सोर्स से करेगें।

वैलमेड अस्पताल के जनरल मैनेजर प्रकाश रावत, जो कि सिलबेडी गाँव के निवासी हैं, उन्होने भी समिति के प्रति व रिखणीखाल के लोगों के प्रति सहानुभूति प्रदर्शित की।उनका कहना था कि रिखणीखाल के लोगों को स्वास्थ्य सम्बन्धित उपचार की जरूरत पड़े तो वे अपने अस्पताल में रियायती मूल्य पर व जैसा भी सम्भव हो,सहायता करेगें। उन्होने अपना मोबाइल नम्बर भी शेयर किया है।उनके यहाँ आयुष्मान कार्ड आदि की भी सुविधा उपलब्ध है।वे वार्षिकोत्सव के दिन निशुल्क चिकित्सा व स्वास्थ्य परीक्षण शिविर भी लगाएंगे। जिसमें ब्रिगेडियर डॉक्टर यशवंत सिंह बिष्ट व प्रकाश रावत आपसी समन्वय कर स्वास्थ्य लाभ देगें। इस बार कार्यकारिणी मेें ये विशिष्ट लोग मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहे।

अन्‍य खबरो के लिए नीचे लिंक पर जाए। 

युटयुब चैनलhttps://www.youtube.com/channel/UCVCkmiPBWlGDz-Vyi8c2Xlg

फेसबुक पेजhttps://www.facebook.com/Voicemountains

व्‍हाटअपhttps://chat.whatsapp.com/KX9oESnS9NHE5fGoUMwOs

Contact- jagjigyasu@gmail.com  8851979611

Related Articles

देवभूमि कार्ड नहीं,सशक्त भू-कानून और मूल निवास का अधिकार चाहिए : उत्तराखण्ड क्रान्ति दल

देहरादून। उत्तराखण्ड में जमीनों की धड़ल्ले से हो रही खरीद-फरोख्त पर विवाद का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया प्रकरणों के सार्वजनिक होने के बाद उत्तराखण्ड क्रान्ति दल एक बार फिर इस गंभीर मुद्दे पर मुखर हो गया है। कचहरी रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में भू-कानून और सरकार के प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ को लेकर पार्टी की महत्वपूर्ण मंथन बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ की अवधारणा, प्रदेश में लगातार हो रही जमीनों की खरीद-फरोख्त तथा मूल निवासियों के अधिकारों से जुड़े गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत, स्पष्ट और प्रभावी भू-कानून की आवश्यकता है। सरकार जिस प्रकार ‘देवभूमि कार्ड’ की व्यवस्था लागू करने की बात कर रही है, वह प्रदेश की मूल समस्या का समाधान नहीं है। इससे उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के संवैधानिक, सामाजिक और भूमि संबंधी अधिकारों को वह संरक्षण नहीं मिलेगा जिसकी आज आवश्यकता है। उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बाहरी व्यक्तियों एवं प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से खुलेआम जमीन खरीदने और बेचने के विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं। यह स्थिति उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान, जनसांख्यिकीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। टोडरिया ने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के बजाय राज्य सरकार उदासीन रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पौड़ी जिले के सबदरखाल में 144 नाली जमीन बिकने का मामला सामने आया है, उससे स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड सरकार का भू-कानून जमीनों की बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भू-कानून भी भू माफियाओं के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया प्रतीत होता है। टोडरिया ने उत्तराखण्ड सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही प्रदेश में जमीनों की इस बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक नहीं लगाई गई तो आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तराखण्ड क्रान्ति दल गांव-गांव जाकर सरकार की इस हिमालय विरोधी सोच और उसकी भू-कानून नीति की पोल जनता के सामने खोलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की जमीन को बाजार बनने नहीं दिया जाएगा और इस लड़ाई को निर्णायक स्तर तक ले जाया जाएगा। केंद्रीय महामंत्री सेवानिवृत्त कर्नल देवरानी ने कहा कि जहां प्रदेश की जनता उत्तराखण्ड सरकार से मूल निवास प्रमाण-पत्र की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार ‘देवभूमि कार्ड’ बनाकर 15 साल के निवास के आधार पर निवास प्रमाण-पत्र देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह प्रदेश के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा करना चाहती है या बाहरी लोगों के लिए स्थायी बसावट का रास्ता आसान करना चाहती है।...

दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में “क्लाइमेट चेंज – बच्चों की नजर से” कार्यक्रम का सफल आयोजन।

रिपोर्ट विक्रम पटवाल देहरादून मे अब गौरय्या कम दिखती है लाल बासमती...

देहरादून- उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रदेश कमेटी की बैठक।

आज दिनांक 20 जुलाई 2026 को उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की...