Home दिल्‍ली एन सी आर दिल्‍ली-पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान मिलने पर सम्‍मान समारोह।
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दिल्‍ली-पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान मिलने पर सम्‍मान समारोह।

रिपोर्ट  विनोद मनकोटी

महाराष्ट्र व गोवा के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान मिलने पर कंस्टीट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हाल में सम्‍मान समारोह किया गया है। जिसमें कोश्यारी जी का दिल्ली की 50 से अधिक संस्थाओं ने नागरिक अभिनंदन किया। इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व कृतित्व पर आधारित पुस्तक भगत सिंह कोश्यारी व्यक्तित्व एवं कृतित्व का विमोचन किया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री भूपेंद्र यादव पर्यावरण एवं बन मंत्री, श्री मोहन सिंह बिष्ट अध्यक्ष दिल्ली विधानसभा, प्रो. वाचस्पति बरखेड़ी वी.सी. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, प्रो. बी बी.एस. नेगी दिल्ली विश्वविद्यालय एवं टी.सी. उप्रेती विशिष्ट अतिथि उपस्थित हुए।
श्री उप्रेति ने कहा कि एक विराट व्यक्तित्व जो अपने सरल और सहज व्यवहार के बल पर अपनी राह तय करते रहे उन्हें पद्म भूषण समान मिलाना हमारे लिए गौरव की बात है। प्रो. नेगी ने उन्हें भविष्य के लिए एक प्रेरणा स्रोत बताते कहा कि वह एक मिशन हैं बचपन से आज तक वह निरंतर चलते रहे परंतु उनके चेहरे पर कभी थकान महसूस नहीं हुई। प्रो. वरखेड़ी ने उन्हें बधाई देते कहा कि सम्मान के साथ उनके कार्यों पर आधारित पुस्तक एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रस्तुत पुस्तक में विधान परिषद से लेकर संसद और फिर राज्यपाल के कार्यकाल तक उनके द्वारा संपन्न कार्यों का विवरण दिया है। श्री बिष्ट ने कहा कि श्री कोश्यारी जी बचपन से ही तीक्ष्ण बुद्धि के रहे । उनके कठिन परिश्रम से ही वह सफल हुए। अल्मोड़ा डिग्री कॉलेज में महासचिव चुने जाने के बाद विधानसभा व संसद के दोनों सदनों के प्रतिनिधि रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि कोश्यारी जी और हमने संघ में कई जगह साथ काम किया है। वह भय और लोभ रहित एक योगी के समान है। उन्होंने कहा कि यह पूरी पुस्तक मैंने पढी है। इस में बहुत सुंदर शब्दावली का प्रयोग कर उनके जीवन में घटने वाली प्रत्येक घटना को मोती के दोनों के समान माला में पिरोया है।उन्होंने पुस्तक के लेखक की सराहना की।
पुस्तक के लेखक डॉ बिहारी लाल जलंधरी ने कहा कि राजनीति से कई तरह के लोग मिलते हैं परंतु श्री कोश्यारी जैसा व्यक्तित्व नहीं देखा । उनके अनुमति से ही यह कार्य संपन्न हुआ। यह एक संदर्भ ग्रंथ है जो भविष्य में शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी होगी।
कार्यक्रम के अंत में कोश्यारी उपस्थित लोगों व संस्थाओं के प्रतिनिधियों को हाथ जोड़कर अभिनंदन कर धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम का आयोजन श्री मनमोहन सती व मंच संचालन श्री नीरज तिवारी व सहयोग श्री कमल घिल्डियाल ने किया।

संदर्भ के लिए डॉ जलन्धरी ने पूरी पुस्तक का संक्षिप्त विवरण दिया है। आरंभ में हिंदी भाषा में पद्मश्री डॉ. श्याम सिंह शशि ने मां भारती को समर्पित कोश्यारी जी भूमिका लिखी । मेरी बात में श्री कोश्यारी जी ने अपना एक छोटा संदेश दिया है। लेखक के दो शब्दों में पुस्तक के विषय में बताया है। आभार अभिव्यक्ति में श्री संजय बलोदी जो महाराष्ट्र राजभवन में श्री कोश्यारी जी के मीडिया संयोजक एवं ए.पी.
आर.ओ. रहे, जिन्हें इस पुस्तक के लिए फोटोग्राफी और विजुअल बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी उन्होंने अपना आभार व्यक्त किया है।
इस पुस्तक में कुल 20 अध्यायों में पहला भगत दा का बचपन जिसमें इनका जन्म कपकोट पालनाधुरा तोक में 01 जून 1942 को पिता श्री गोपाल सिंह और माता श्रीमती मोतिया देवी के घर हुआ। दादाजी श्री खिम सिंह जिन्हें लोग भगत जी कहा करते थे उनकी इच्छा पर ही इनका नाम भगत सिंह रखा गया। इनका परिवार कुछ समय बाद पालनाधुरा से चैताबगड़ आकर बस गया था।
भगत दा की शिक्षा में -इनकी प्राथमिक शिक्षा गांव के पास महरगाड़ी आधारिक विद्यालय से हुई । पांचवीं पास करने के बाद गांव से 8 किमी दूर समा जूनियर हाईस्कूल में कक्षा 6 से आठवीं तक पढ़ाई की। समा से आठवीं पास करने के बाद 50 किमी दूर कपकोर्ट हाई स्कूल में दाखिला ले लिया।
कपकोट से दसवीं पास करने के बाद वह पिथौरागढ़ जाकर इंटर कॉलेज में भर्ती हो गए।जहां से बारहवीं पास करने के बाद अल्मोड़ा जाकर बीए में दाखिला ले लिया। अल्मोड़ा डिग्री कॉलेज में सन 1962 में बीए पास कर अंग्रेजी माध्यम से एम.ए. में प्रवेश ले लिया। एम. ए. उत्तीर्ण करने के बाद यह कासगंज के राजा के रामपुर इंटर कॉलेज में अंग्रेजी माध्यम के प्राध्यापक नियुक्त हो गए।
सन 1965 में यह कुछ दिन सरस्वती शिशु मंदिर जीवन धाम अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ में आचार्य रहे।
समाज सेवा में यह विवेकानंद के विचारों से प्रभावित होकर साधू बनना चाहते थे। उनके मित्र श्री खड़क दा उन्हें संघ की शाखा में ले गए, जहां उन्होंने ध्वज को झुककर प्रणाम करने कहा। ऐसे में कोश्यारी जी ने कहा कि मैं झुकता नहीं । खड़क दा द्वारा 8-10 स्वयं सेवकों से परिचय कराने के बाद वह उनके साथ घुल मिल गए। खड़क दा ने उन्हें कहा कि सेवा करनी है तो संघ से जुड़कर सेवा करो। वह पूरी तरह संघ से जुड़ गए। इस तरह भगत दा कई पड़ाव पार करते हुए आपातकाल तक पहुंच गए। जहां उन्हें 03 जुलाई 1975 को गिरफ्तार किया गया और 23 मई ,1977 के दिन फतेहगढ़ जेल से रिहा हुए।
सन् 1975 से उन्होंने पर्वत पीयूष साप्ताहिक समाचार पत्र निकाला । भगत दा निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकार रहे । इस पत्र को अब श्री नंदन सिंह कोश्यारी प्रकाशित करवाते हैं।
राज्य आंदोलन के दौरान उन्होंने कुछ साथियों के साथ मिलकर उत्तरांचल उत्थान परिषद संस्था की स्थापना 1988 में की । जिसके वह महासचिव रहे। उन्होंने उत्तरांचल प्रदेश क्यों ? और एक विवेचन व उत्तरांचल उत्थान परिषद क्यों ? 28 पृष्ठों की एक पुस्तक प्रकाशित की।
सन् 1994 के दौर में उन्होंने समर्पण नाम से 28 पेज की दूसरी पुस्तक प्रकाशित की। इन दोनों पुस्तकों का पूर्ण विवरण इस ग्रंथ में दिया गया है।
वह प्रथम सरकार में ऊर्जा, सिंचाई कानून और विधाई मंत्री रहे। इस ग्रंथ में उनकी कई महत्वपूर्ण चर्चाओं को शामिल किया गया है।
उत्तरांचल के द्वितीय मुख्यमंत्री के रूप में 20 नवंबर, 2001 के दिन श्री नित्यानंद स्वामी द्वारा त्यागपत्र देने के बाद श्री भगत सिंह कोश्यारी को विधायक दल का नेता चुना गया तथा प्रदेश के द्वितीय मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दे दी गई। मुख्यमंत्री के कार्यकाल में उन्होंने सैकड़ो समस्याओं का समाधान किया।
राज्यसभा में सांसद के रूप में उन्हें फरवरी 2008 में मनोनीत किया गया । अपने 5 साल के कार्यकाल में सैकड़ो विषयों पर चर्चा की तथा सरकार से समस्याओं से संबंधित कई प्रश्न पूछे गए, जिसका विवरण इस संदर्भ ग्रंथ में है।
वह सन 2009 से 2014 तक संसद की याचिका समिति के अध्यक्ष रहे। इस कार्यकाल में उन्होंने ऐतिहासिक कार्य संपन्न किए।
उन्होंने संयुक्त राज्य सुरक्षा परिषद में मानव तस्करी पर भाषण दिया तथा राज्यपाल के कार्यकाल का विवरण इस ग्रंथ में दिया गया है।
भगत दा लोक स्मृतियों में चर्चित हैं । उनके करीबी कुछ लोगों के स्मरण इस ग्रंथ में उनकी फोटो के साथ दिये हैं । उनके द्वारा सरमूल की पैदल यात्रा वृत्तांत यहां दिया गया है।
अंत में भगतदा के जीवन में आए महान व्यक्तियों उन्हें चाहने वाले तथा पारिवारिक सदस्यों के चित्र दिए गए हैं।
लेखक को जो मिला, देखा, समझा उसी तथ्य के आधार पर कलमवद्ध किया।
यह पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है ।जिसकी कीमत रु. 995 रखी गईं हैं। यह पुस्तक इसके लेखक डॉ बिहारीलाल जलन्धरी से 40% छूट पर मिल सकती है।

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