Home उत्तराखंड देहरादून देहरादून-रेपिडो की सत्यापन प्रक्रिया पर UKD ने उठाए सवाल, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर SSP को सौंपा ज्ञापन
देहरादून

देहरादून-रेपिडो की सत्यापन प्रक्रिया पर UKD ने उठाए सवाल, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर SSP को सौंपा ज्ञापन

उत्तराखण्ड क्रांति दल (UKD) ने राज्य में संचालित ऑनलाइन बाइक टैक्सी प्लेटफॉर्म Rapido की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। दल का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर चालकों के पंजीकरण एवं सत्यापन की प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती जा रही है, जिससे महिलाओं एवं आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में है।

केंद्रीय महामंत्री मीनाक्षी घिल्डियाल ने कहा कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में महिलाएं एवं आमजन Rapido सेवा का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन चालक सत्यापन की प्रक्रिया अत्यंत कमजोर होने के कारण आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी आसानी से इस प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं।

दल ने आरोप लगाया कि पूर्व में Rapido चालकों द्वारा छेड़छाड़, दुर्व्यवहार, चोरी तथा अन्य आपराधिक गतिविधियों के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ घटनाओं में यह भी पाया गया है कि बुकिंग के दौरान प्रदर्शित वाहन एवं चालक की जानकारी वास्तविकता से मेल नहीं खाती, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

इसके अतिरिक्त UKD ने यह भी आशंका जताई कि पार्सल डिलीवरी सेवाओं के माध्यम से अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है, जो कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।

UKD ने माँग की कि Rapido से जुड़े सभी चालकों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन किया जाए। बिना सत्यापन के किसी भी चालक को संचालन की अनुमति न दी जाए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए SOS, लाइव ट्रैकिंग एवं हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं अनिवार्य की जाएं तथा राज्य स्तर पर सख्त दिशा-निर्देश लागू किए जाएं।

दल ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो जनहित में आंदोलन किया जाएगा।

संगठन महामंत्री नैना लखेरा, महिला अध्यक्ष मेजर संतोष भंडारी, उत्तरापंत बहुगुणा, रविंद्र ममगईं, कल्पना बिजलवान, सुनील मंडोलिया, गिरीश कोठारी आदि मौजूद रहे ।

Related Articles

देवभूमि कार्ड नहीं,सशक्त भू-कानून और मूल निवास का अधिकार चाहिए : उत्तराखण्ड क्रान्ति दल

देहरादून। उत्तराखण्ड में जमीनों की धड़ल्ले से हो रही खरीद-फरोख्त पर विवाद का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया प्रकरणों के सार्वजनिक होने के बाद उत्तराखण्ड क्रान्ति दल एक बार फिर इस गंभीर मुद्दे पर मुखर हो गया है। कचहरी रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में भू-कानून और सरकार के प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ को लेकर पार्टी की महत्वपूर्ण मंथन बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ की अवधारणा, प्रदेश में लगातार हो रही जमीनों की खरीद-फरोख्त तथा मूल निवासियों के अधिकारों से जुड़े गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत, स्पष्ट और प्रभावी भू-कानून की आवश्यकता है। सरकार जिस प्रकार ‘देवभूमि कार्ड’ की व्यवस्था लागू करने की बात कर रही है, वह प्रदेश की मूल समस्या का समाधान नहीं है। इससे उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के संवैधानिक, सामाजिक और भूमि संबंधी अधिकारों को वह संरक्षण नहीं मिलेगा जिसकी आज आवश्यकता है। उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बाहरी व्यक्तियों एवं प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से खुलेआम जमीन खरीदने और बेचने के विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं। यह स्थिति उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान, जनसांख्यिकीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। टोडरिया ने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के बजाय राज्य सरकार उदासीन रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पौड़ी जिले के सबदरखाल में 144 नाली जमीन बिकने का मामला सामने आया है, उससे स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड सरकार का भू-कानून जमीनों की बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भू-कानून भी भू माफियाओं के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया प्रतीत होता है। टोडरिया ने उत्तराखण्ड सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही प्रदेश में जमीनों की इस बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक नहीं लगाई गई तो आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तराखण्ड क्रान्ति दल गांव-गांव जाकर सरकार की इस हिमालय विरोधी सोच और उसकी भू-कानून नीति की पोल जनता के सामने खोलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की जमीन को बाजार बनने नहीं दिया जाएगा और इस लड़ाई को निर्णायक स्तर तक ले जाया जाएगा। केंद्रीय महामंत्री सेवानिवृत्त कर्नल देवरानी ने कहा कि जहां प्रदेश की जनता उत्तराखण्ड सरकार से मूल निवास प्रमाण-पत्र की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार ‘देवभूमि कार्ड’ बनाकर 15 साल के निवास के आधार पर निवास प्रमाण-पत्र देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह प्रदेश के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा करना चाहती है या बाहरी लोगों के लिए स्थायी बसावट का रास्ता आसान करना चाहती है।...

दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में “क्लाइमेट चेंज – बच्चों की नजर से” कार्यक्रम का सफल आयोजन।

रिपोर्ट विक्रम पटवाल देहरादून मे अब गौरय्या कम दिखती है लाल बासमती...

देहरादून- उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रदेश कमेटी की बैठक।

आज दिनांक 20 जुलाई 2026 को उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की...