Home उत्तराखंड देहरादून अब कमल कहाँ खिलेगा, समाज तय करेगा ?
देहरादून

अब कमल कहाँ खिलेगा, समाज तय करेगा ?

उत्तराखंड का अंकिता हत्या काण्ड में भाजपा के कुछ नेताओं के नाम आ रहे है. आज देहरादून में एक विरोध प्रदर्शन भी किया गया जहाँ हजारों की संख्या में महिला शक्ति ने भी हिस्सा लिया. अगर धामी सरकार किसी को बचाना नहीं चाहती तो इस हत्यकाण्ड को सी बी आई को क्यों नहीं सौंप देती, आखिर धामी सरकार किसको बचाना चाहती है, कहीं ऐसा ना हो कि किसी को बचाने के चककर में उत्तराखंड में कमल खिलना ही बंद हो जाए. पहाड़ कि जनता वैसे ही कई समस्याओं से जूझ रहीं है, उन पर कहीं भालू रीछ हमला कर रहे हैं, कहीं गुलदार हमला कर रहें हैं, कहीं जल जंगल ज़मीन का मुद्दा विचलित कर रहा है, कहीं बाहरी लोगो द्वारा अतिक्रमण निरंतर हो रहा है आदि आदि.
प्रवासी लोगो द्वारा भी आज दिल्ली के जंतर मंतर में अंकिता भंडारी केस में एक धरना प्रदर्शन किया गया जिसमें हत्यारों को जल्दी से जल्दी पकड़ने पर जोर दिया गया और सी बी आई से निष्पक्षता से जांच करने पर जोर दिया.

अगर पहाड़ में पहाड़ी को ही इन्साफ नहीं मिलेगा, पहाड़ी को ही मुलभुत जरूरतों के लिए आंदोलन करना पड़ेगा, पहाड़ में ही पहाड़ी किसी गैर पहाड़ी से प्रताड़ित होगा, तो सोचो पहाड़ी अब क्या करेगा? कब तक सड़को पर पहाड़ी दौड़ता रहेगा और कब तक चुप चाप बैठा रहेगा.

उत्तराखंड आंदोलन में प्रवासियों ने बहुत बड़ा योगदान दिया था और सेहभागिता भी कि थी. अब फिर समय आ गया हैं कि पहाड़ कि सभी प्रवासी सभाऐ भाजपा के प्रांतीय अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और नगर के अध्यक्ष को अंकिता भंडारी हत्याकांड के बारे में बताये और एक पहाड़ी होने के नाते उनसे अनुरोध करें कि धामी सरकार को इस हत्या काण्ड कि निष्पक्षता जांच कराने के लिए जल्दी से जल्दी सी बी आई कि जांच कराने के आदेश दे, नहीं तो मालूम नहीं कि कमल कहाँ कहाँ खिलेगा और कहाँ कहाँ नहीं. अपने अपने नगरो में जो भी पहाड़ी भाई भाजपा के किन्ही पदों पर आसीन हैं उनको भी पत्र लिखो हस्तक्षेप करने के लिए. समाज की मिली जुली आवाज में बहुत ताकत होती है.

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