Home उत्तराखंड देहरादून दून-इंडोनेशिया सरकार में बाली से विधायक डॉक्टर सोमवीर का देहरादून मे स्‍वागत।
देहरादूनहरिद्वार

दून-इंडोनेशिया सरकार में बाली से विधायक डॉक्टर सोमवीर का देहरादून मे स्‍वागत।

रिपोर्ट कमलेश पुरोहित

देवभूमि उत्तराखंड आगमन पर आज इंडोनेशिया सरकार में बाली से विधायक डॉक्टर सोमवीर का देहरादून एयरपोर्ट पर स्वागत एवं अभिनंदन किया । डॉ सोमवीर स्पर्श हिमालय महोत्सव 2024 में अतिथि अतिथि के तौर पर भाग लेने आए हैं विदित हो कि यह कार्यक्रम मुख्य रूप से 25 से 27 तक भारत के पहले “लेखक गांव थानों ” में आयोजित किया जाएगा ।
डॉ सोमवीर लगातार दूसरी बार बाली से विधायक बने हैं तथा इंडोनेशिया सरकार में बाली के प्रतिनिधि के तौर पर शिक्षा एवं कानून का पोर्टफोलियो देखते हैं
उल्लेखनीय है कि डॉ सोमवीर ने 2009 में इंडोनेशिया की नागरिकता ग्रहण कर ली थी। दिल्ली यूनिवर्सिटी से “रामायण इन इंडोनेशिया” विषय में पीएचडी करने के बाद डॉ सोमवीर इंडोनेशिया विश्वविद्यालय जकार्ता व उदयना विश्वविद्यालय बाली में भारतीय दर्शन व संस्कृति विषय के प्रवक्ता रहे हैं।

डाॅ सोमवीर इंडोनेशिया में प्रमुख योगाचार्य के रूप में विख्यात हैं वे इंडोनेशिया की भाषा में 10 पुस्तकें लिख चुके हैं। पूर्व में वह प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की इंडोनेशिया यात्रा के समय अनुवादक के रूप में उनके साथ रहे । डॉ सोमवीर मूल रूप से हरियाणा के कोसली उपमंडल के जखाला गांव निवासी है । उन्होंने कहा कि जब भी मैं भारत भूमि पर आता हूं तो मैं अपनी पुरानी स्मृतियों में लौट जाता हूं। जब भी मुझे भारत आने का अवसर मिलता है तो मैं दौड़ा चला आता हूं। यहां आ कर मुझे आत्मिक शांति मिलती है। भारत ऋषि मुनियों की भूमि है आज भारत विश्व पटल पर छाया हुआ है। इस दौरान डॉ शिवचरण नौडियाल, डाॅ चेतन गौड़ , डॉ अनूप बहुखंडी, डॉ ललित शर्मा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य संजीव चौहान, आदि उपस्थित रहे।

अन्‍य खबरो के लिए नीचे लिंक पर जाए। 

Related Articles

देवभूमि कार्ड नहीं,सशक्त भू-कानून और मूल निवास का अधिकार चाहिए : उत्तराखण्ड क्रान्ति दल

देहरादून। उत्तराखण्ड में जमीनों की धड़ल्ले से हो रही खरीद-फरोख्त पर विवाद का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया प्रकरणों के सार्वजनिक होने के बाद उत्तराखण्ड क्रान्ति दल एक बार फिर इस गंभीर मुद्दे पर मुखर हो गया है। कचहरी रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में भू-कानून और सरकार के प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ को लेकर पार्टी की महत्वपूर्ण मंथन बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘देवभूमि कार्ड’ की अवधारणा, प्रदेश में लगातार हो रही जमीनों की खरीद-फरोख्त तथा मूल निवासियों के अधिकारों से जुड़े गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत, स्पष्ट और प्रभावी भू-कानून की आवश्यकता है। सरकार जिस प्रकार ‘देवभूमि कार्ड’ की व्यवस्था लागू करने की बात कर रही है, वह प्रदेश की मूल समस्या का समाधान नहीं है। इससे उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के संवैधानिक, सामाजिक और भूमि संबंधी अधिकारों को वह संरक्षण नहीं मिलेगा जिसकी आज आवश्यकता है। उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बाहरी व्यक्तियों एवं प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से खुलेआम जमीन खरीदने और बेचने के विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे हैं। यह स्थिति उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान, जनसांख्यिकीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। टोडरिया ने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के बजाय राज्य सरकार उदासीन रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पौड़ी जिले के सबदरखाल में 144 नाली जमीन बिकने का मामला सामने आया है, उससे स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड सरकार का भू-कानून जमीनों की बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भू-कानून भी भू माफियाओं के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया प्रतीत होता है। टोडरिया ने उत्तराखण्ड सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही प्रदेश में जमीनों की इस बेतहाशा खरीद-फरोख्त पर रोक नहीं लगाई गई तो आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तराखण्ड क्रान्ति दल गांव-गांव जाकर सरकार की इस हिमालय विरोधी सोच और उसकी भू-कानून नीति की पोल जनता के सामने खोलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की जमीन को बाजार बनने नहीं दिया जाएगा और इस लड़ाई को निर्णायक स्तर तक ले जाया जाएगा। केंद्रीय महामंत्री सेवानिवृत्त कर्नल देवरानी ने कहा कि जहां प्रदेश की जनता उत्तराखण्ड सरकार से मूल निवास प्रमाण-पत्र की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार ‘देवभूमि कार्ड’ बनाकर 15 साल के निवास के आधार पर निवास प्रमाण-पत्र देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उत्तराखण्ड के मूल निवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह प्रदेश के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा करना चाहती है या बाहरी लोगों के लिए स्थायी बसावट का रास्ता आसान करना चाहती है।...

दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में “क्लाइमेट चेंज – बच्चों की नजर से” कार्यक्रम का सफल आयोजन।

रिपोर्ट विक्रम पटवाल देहरादून मे अब गौरय्या कम दिखती है लाल बासमती...

देहरादून- उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रदेश कमेटी की बैठक।

आज दिनांक 20 जुलाई 2026 को उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की...