Home उत्तराखंड कोरोना महामारी लाॅक डाउन के बीच प्रदेश कांग्रेस सचिव कविन्द्र इष्टवाल अपनी विधानसभा मे कर रहे जरुरत मंदो की मदद
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कोरोना महामारी लाॅक डाउन के बीच प्रदेश कांग्रेस सचिव कविन्द्र इष्टवाल अपनी विधानसभा मे कर रहे जरुरत मंदो की मदद

रिपोर्ट     जगमोहन डांगी

कोरोना महामारी के चलते लगाये गये लाॅक डाउन के बीच प्रदेश कांग्रेस सचिव कविन्द्र इष्टवाल द्वारा पौडी जनपद की चैबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र में लगातार जरूरतमंद ग्रामीणों के बीच मेंरहकर उन्हे सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
कविन्द्र इष्टवाल द्वारा गरीब व मजदूरी कर रोज मर्रा के लिए जीवन यापन के साधन जुटाने वाले ग्रामीणों के साथ इस महामारी में कंधे से कंधा मिलाकर उनकी सहायता की जा रही है। इष्टवाल द्वारा अभी तक पूरे विधानसभा क्षेत्र में हजारों मास्क, सैनिटाईजर तथा खाद्यान्न के पैकेट वितरित किये गये हैं। उन्होंने कहा कि वे चैबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधि तथा एक जिम्मेदार राजनैतिक दल के पदाधिकारी होने के नाते प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री प्रीतम सिंह जी के निर्देश पर इस संकट की घडी में गरीब जनता के साथ खड़े हैं


कविन्द्र इष्टवाल ने कहा कि जहां राज्य सरकार पर्वतीय जनपद के लोगों के प्रति असंवेदनशील बनी हुई है वहीं कोरोना महामारी में लगाये गये लाॅक डाउन के चलते कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा स्वयं के संसाधनों पर गरीब व मजदूर वर्ग के लोगों के लिए खाद्यान्न, सैनिटाईजर, मास्क आदि की व्यवस्था के लिए भी उनका धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि हजारों की संख्या में पहाड से पलायन कर गये लोग आज अपने घर वापस आना चाहते हैं परन्तु राज्य सरकार के पास उनके लिए कोई रोड मैप नहीं है। उन्होंने कहा कि एक ओर तो राज्य सरकार पलायन आयोग जैसी संस्था का गठन कर उस पर लाखों रूपये वेतन आदि के नाम पर खर्च करती है परन्तु जब प्रवासी नागरिक अपने गांव वापस लौटना चाहते हैं तब उनके लिए सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अभी तक न तो प्रवासियों को वापस लाने के ही पुख्ता इंतजाम कर पाई है और न ही उनके लिए आगे के रोजगार के लिए कोई नीति बना पाई है। उन्होंने कहा कि आज की तिथि में उत्तराखण्ड राज्य के हजारों प्रवासी नागरिक देशभर के विभिन्न शहरों में फंसे हुए है तथा उनके पास संसाधनों की भी कमी है परन्तु सरकार उन्हें वापस लाने के लिए बयानबाजी के अलावा कुछ नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग किसी प्रकार अपने घर वापस आ भी चुके हैं उन्हंें भी सरकार ने क्वारेंटाईन के नाम पर स्कूलों में ग्राम प्रधानों के भरोसे ठहराया हुआ है पर उनके खाने-पीने तथा स्वास्थ्य परीक्षण के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई है।
कविन्द्र इष्टवाल ने कहा कि पर्वतीय जनपदों में अधिकतर बुजुर्ग एवं असहाय लोग रह रहे थे जिन्हें कई’-कई किलो मीटर की दूरी तय कर खाने-पीने का सामान लाना पड़ता है परन्तु लाॅक डाउन के कारण आवागमन के भी संसाधन बन्द हैं तथा उन लोगों के पास खाद्यान्न की भी कमी होने लगी है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि राज्य में बाहरी राज्यों से वापस आने वाले प्रवासी नागरिकांें की समुचित व्यवस्था करे तथा उनका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराये

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