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पौडी-यमकेश्वर में चकबंदी जागरूकता कार्यशाला सम्पन्न, ग्रामीणों ने समझा स्वैच्छिक चकबंदी का महत्व

जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने दिखाई रुचि, ऑनलाइन व ऑफलाइन आवेदन भी भरे

यमकेश्वर (पौड़ी गढ़वाल)। पहाड़ों में बिखरी कृषि भूमि को व्यवस्थित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 30 अक्टूबर 2026 को पौड़ी गढ़वाल जनपद के यमकेश्वर विकासखंड में चकबंदी मंच उत्तराखंड के सहयोग से स्वैच्छिक चकबंदी पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला का आयोजन स्वयंसेवी संस्था के सक्रिय कार्यकर्ताओं श्री शंकर दत्त सती, श्री सतेंद्र रावत, श्री कुलदीप बिष्ट एवं श्री मनु जुयाल के प्रयासों से किया गया।

कार्यशाला में चकबंदी मंच उत्तराखंड के उपाध्यक्ष श्री भूपेंद्र सिंह बग्लाणा (ग्राम सूला, पौड़ी) सहित यमकेश्वर क्षेत्र के क्षेत्र पंचायत सदस्य श्री अनिल कुमार, ग्राम प्रधान श्रीमती देवेश्वरी देवी, श्री मोहन सिंह, श्री उपेंद्र प्रसाद, श्री नवीन कुमार, खंड विकास अधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मंच के उपाध्यक्ष श्री भूपेंद्र सिंह बग्लाणा ने ग्रामीणों को स्वैच्छिक चकबंदी के महत्व और इसके लाभों की जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने पूर्वजों के समय से गोल खातों में बिखरी कृषि भूमि को व्यक्तिगत खातों में दर्ज कराने तथा आपसी सहमति से भूमि की अदला-बदली कर एक या दो स्थानों पर चक बनाने के लिए संबंधित तहसीलों में अधिक से अधिक आवेदन प्रस्तुत करें।

उन्होंने यह भी बताया कि जिन भूमिधरों ने आपसी सहमति से अपने एक-दो खेतों की अदला-बदली कर ली है, वे भी अपनी भूमि को व्यक्तिगत खातों में व्यवस्थित कराने के लिए नियमानुसार दूसरा आवेदन प्रस्तुत करें।

श्री बग्लाणा ने चकबंदी के विभिन्न लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे भूमि विवादों में कमी आएगी, खेती करना आसान होगा, कृषि भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित होगी तथा स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, पलायन से प्रभावित गांवों को फिर से आबाद करने में भी चकबंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कार्यशाला में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने चकबंदी मंच के इस प्रयास की सराहना की। ग्रामीणों ने स्वीकार किया कि अभी भी गांवों में चकबंदी को लेकर पर्याप्त जानकारी का अभाव है। ऐसे में मंच द्वारा चलाया जा रहा जागरूकता अभियान सराहनीय है। कार्यशाला के दौरान ग्रामीणों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से चकबंदी के आवेदन भी भरे।

कार्यशाला के समापन पर मंच के उपाध्यक्ष ने खंड विकास अधिकारी से आग्रह किया कि ग्राम पंचायतों की खुली बैठकों में भी चकबंदी के विषय को शामिल किया जाए और संबंधित अधिकारियों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया जाए। इससे ग्रामीण सरकार के चकबंदी अधिनियम एवं नियमावली 2016/2020 तथा स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026 के अंतर्गत उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकेंगे।

चकबंदी मंच उत्तराखंड का स्पष्ट संदेश है कि पहाड़ की बिखरी कृषि भूमि को व्यवस्थित एवं सुरक्षित करने के लिए सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को मिलकर आगे आना होगा।

प्रस्तुति: भूपेंद्र सिंह बग्लाणा
चकबंदी मंच उत्तराखंड

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