वैशाली में भव्यता के साथ संपन्न हुआ ‘उत्तराखंडी कौतिक 2026’, लोकगायक फौजी ललित मोहन जोशी और कल्पना चौहान की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
वैशाली (गाजियाबाद)। देवभूमि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, पारंपरिक संगीत और पहाड़ी खानपान की खुशबू जब एक ही मंच पर बिखरी तो पूरा माहौल उत्तराखंडमय हो गया। मौका था उत्तराखंड धरोहर संरक्षण समिति (पंजी.), वैशाली की ओर से सेक्टर-3 स्थित रामलीला पार्क में आयोजित भव्य ‘उत्तराखंडी कौतिक 2026’ का। ‘संस्कृति से समृद्धि की ओर’ के मूलमंत्र के साथ आयोजित इस सांस्कृतिक महोत्सव में दिल्ली-NCR से हजारों की संख्या में प्रवासी उत्तराखंडियों और स्थानीय लोगों ने शिरकत की।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक फौजी ललित मोहन जोशी और लोकप्रिय लोकगायिका कल्पना चौहान की शानदार प्रस्तुतियां रहीं। दोनों कलाकारों ने अपने लोकप्रिय पहाड़ी गीतों से ऐसा समां बांधा कि दर्शक ढोल-दमाऊं की थाप और लोकधुनों पर झूमने को मजबूर हो गए।
सांस्कृतिक मंच पर युवा गायिका एवं समिति की सांस्कृतिक सचिव शशि पाठक, युवा गायक कमल जोशी तथा लोकगायक एवं सांस्कृतिक सचिव पूरन चंद्र पांडे ने भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संगीत निर्देशन प्रसिद्ध संगीतकार राजेंद्र चौहान ने किया, जबकि नृत्य निर्देशन की जिम्मेदारी दीप चंद्रा एवं मीनाक्षी चंद्रा ने निभाई।
महोत्सव में समिति के सदस्यों और नन्हे बाल कलाकारों ने उत्तराखंड के पारंपरिक लोकनृत्य छोलिया, झोड़ा और छपेली की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर अपनी सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत झलक पेश की। इन प्रस्तुतियों को दर्शकों की खूब सराहना मिली।
पहाड़ी व्यंजनों और हस्तशिल्प ने भी खींचा लोगों का ध्यान
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ उत्तराखंड के पारंपरिक खानपान के स्टॉल भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। मंडुवे की रोटी, गहत की दाल, भट्ट की चुरकानी और झंगोरे की खीर जैसे पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का लोगों ने जमकर स्वाद लिया। वहीं पहाड़ी हस्तशिल्प, शुद्ध जैविक उत्पादों, पारंपरिक मसालों और आभूषणों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए लगाए गए स्टॉल पर भी लोगों की खूब भीड़ उमड़ी।
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष मदन सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंडी कौतिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि अपनी माटी, भाषा, लोकपरंपराओं और पहचान को जीवित रखने का सशक्त माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।
वहीं समिति की महासचिव सविता गोसाईं ने कार्यक्रम में पहुंचे सभी अतिथियों, कलाकारों और दर्शकों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले समिति के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।
कुल मिलाकर, ‘उत्तराखंडी कौतिक 2026’ ने दिल्ली-NCR में बसे प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी माटी, संस्कृति, लोकसंगीत और परंपराओं से जोड़ने का एक यादगार मंच प्रदान किया। पहाड़ी गीतों की गूंज, लोकनृत्यों की थाप और पारंपरिक व्यंजनों के स्वाद ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।

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