रिपोर्ट प्रभुपाल सिंह रावत
रिखणीखाल विकासखंड क्षेत्र में हिंसक बाघ एवं तेंदुओं के बढ़ते आतंक पर आज रिखणीखाल वेलफेयर सोसायटी द्वारा जिलाधिकारी पौडी को पत्र लिख कर समस्या पर समाधान के लिए एक पत्र भेजा गया।
सेवा में,
जिला अधिकारी महोदया,
जनपद पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखंड।
विषय: रिखणीखाल विकासखंड क्षेत्र में हिंसक बाघ एवं तेंदुओं के बढ़ते आतंक से ग्रामीणों की सुरक्षा एवं समस्या के स्थायी समाधान हेतु अनुरोध।
महोदया,
सविनय निवेदन है कि रिखणीखाल विकासखंड के अधिकांश ग्रामों में विगत लगभग दो वर्षों से बाघ एवं तेंदुओं के आतंक के कारण ग्रामीणों में भय एवं असुरक्षा का वातावरण बना हुआ है। हिंसक वन्यजीवों द्वारा लगातार ग्रामीणों एवं उनके पालतू पशुओं पर हमले किए जा रहे हैं, जिसके कारण ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों के लिए स्वयं तथा अपने पालतू पशुओं की सुरक्षा करना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है।
बड़े दुःख के साथ अवगत कराना है कि दिनांक 06-08-2026 को ग्राम अंगनी निवासी श्री मातबर सिंह पर बाघ द्वारा हमला किया गया। वर्तमान में उनका उपचार रिखणीखाल अस्पताल में चल रहा है। यदि उनके साथ मौजूद लोगों ने समय पर शोर मचाकर बाघ को नहीं भगाया होता, तो यह घटना जानलेवा साबित हो सकती थी।
महोदया, यह घटना कोई पहली घटना नहीं है। रिखणीखाल क्षेत्र में पिछले कई वर्षों के दौरान बाघ एवं तेंदुओं द्वारा ग्रामीणों तथा उनके मवेशियों पर दर्जनों हमले एवं घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं की सूचना स्थानीय प्रशासन एवं वन विभाग को समय-समय पर दी जाती रही है तथा कई बार शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं। इसके बावजूद हिंसक वन्यजीवों से ग्रामीणों एवं उनके पालतू पशुओं की सुरक्षा के लिए अपेक्षित प्रभावी एवं स्थायी कार्रवाई नहीं हो पाई है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों में यह चिंता भी बनी हुई है कि वे हिंसक वन्यजीवों से अपनी एवं अपने पशुओं की सुरक्षा किस प्रकार करें। इसके अतिरिक्त, बाघ एवं तेंदुओं के हमले में घायल अथवा मृत व्यक्तियों तथा मवेशियों की क्षति के संबंध में समुचित एवं समयबद्ध मुआवजा उपलब्ध कराया जाना भी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि क्षेत्र के अनेक ग्रामीणों की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है। साथ ही, मुआवजा प्राप्त करने की प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में भी ग्रामीणों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अतः आपसे अनुरोध है कि रिखणीखाल विकासखंड में पिछले तीन वर्षों के दौरान बाघ एवं तेंदुओं द्वारा मनुष्यों एवं मवेशियों को पहुंचाए गए नुकसान की घटनाओं का वन विभाग से विस्तृत विवरण प्राप्त कर, सभी पात्र पीड़ितों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिलाने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने की कृपा करें।
वर्तमान समय में विगत दो माह के दौरान हुई घटनाओं का विवरण संलग्न है:
महोदया, ग्रामीणों का विश्वास है कि आप जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर आसीन होने के कारण इस गंभीर समस्या के समाधान हेतु संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान कर सकती हैं। ग्रामीणों के जान-माल की सुरक्षा अत्यंत गंभीर एवं संवेदनशील विषय है। यदि समय रहते प्रभावी एवं ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में किसी बड़ी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल एवं प्रभावी कार्रवाई करने की कृपा करें:
1. रिखणीखाल विकासखंड में हिंसक बाघ एवं तेंदुओं की गतिविधियों की तत्काल निगरानी एवं आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
2. संवेदनशील एवं प्रभावित ग्रामों को चिन्हित कर ग्रामीणों की सुरक्षा हेतु वन विभाग एवं प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की जाए।
3. मानव एवं मवेशियों पर हुए पूर्व के हमलों की समीक्षा कर पात्र पीड़ितों को नियमानुसार शीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
4. मुआवजा प्राप्त करने की प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी ग्रामीणों को स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए।
5. वन विभाग, जिला प्रशासन एवं ग्राम पंचायतों के समन्वय से हिंसक वन्यजीवों की समस्या के समाधान हेतु स्थायी एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।
6. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक सुरक्षा एवं जागरूकता उपाय तत्काल लागू किए जाएं।
हमें पूर्ण आशा एवं विश्वास है कि आप इस गंभीर समस्या पर सहानुभूतिपूर्वक एवं प्राथमिकता के आधार पर ध्यान देते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश प्रदान करेंगी तथा रिखणीखाल क्षेत्र के ग्रामीणों के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी कार्रवाई करेंगी।
धन्यवाद।
भवदीय,
भगवान सिंह रावत
महासचिव
रिखणीखाल वेलफेयर सोसायटी
उत्तराखंड।
रिखणीखाल विकासखंड में बाघ एवं तेंदुओं द्वारा हुई घटनाओं का विवरण
1. ग्राम पंचायत नावेतल्ली के अंतर्गत ग्राम गवाणा एवं ग्राम नावेतल्ली:
दिनांक 23-06-2026 से 15-07-2026 के मध्य बाघ/तेंदुए द्वारा रात के समय गौशालाओं से तथा दिन के समय चारागाह में ग्रामीणों के 6 बकरे मार दिए गए। इस घटना में चार ग्रामीणों के पशुओं की क्षति हुई जिसकी अनुमानित कुल कीमत लगभग ₹70,000/- (सत्तर हजार रुपये) है।
2. ग्राम कठुड:
ग्राम कठुड में विगत लगभग दो वर्षों में घरेलू मवेशियों, यहां तक कि खच्चरों तक पर बाघ/तेंदुए द्वारा लगभग 35–40 हमले किए जा चुके हैं। हाल ही में पिछले माह रात लगभग 11:00 बजे बाघ द्वारा एक ग्रामीण की दूध देने वाली गाय पर हमला किया गया। लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण ग्रामीणों में अत्यधिक भय एवं असुरक्षा का वातावरण बना हुआ है।
3. ग्राम उनेरी एवं ग्राम कोयटा, ग्राम पंचायत गुठरता:
वर्ष 2024 में रक्षाबंधन के समय, ग्राम उनेरी निवासी लगभग 5 वर्षीय बालक अपने ननिहाल ग्राम कोयटा, ग्राम पंचायत गुठरता आया हुआ था। इसी दौरान गांव के भीतर ही बाघ ने उस बालक पर हमला कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो गई। यह घटना इस बात को दर्शाती है कि हिंसक वन्यजीवों का खतरा अब केवल जंगल अथवा चारागाह तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों के भीतर तक पहुंच चुका है।
4. ग्राम किमगांव, ग्राम पंचायत पटोटिया:
दिनांक 28-06-2024 को ग्राम किमगांव निवासी श्री मोहन सिंह रावत बकरी चराने के दौरान बाघ के हमले का शिकार हुए। उन्होंछने किसी प्रकार अपनी जान बचाई। हमले में घायल होने के कारण उन्हें लगभग 10 दिनों तक कोटद्वार अस्पताल में भर्ती रहकर उपचार कराना पड़ा। यह घटना भी क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को स्पष्ट करती है।

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