दुगड्डा में चकबंदी जागरूकता कार्यशाला सम्पन्न
ग्रामीणों ने समझा स्वैच्छिक चकबंदी का महत्व, जनप्रतिनिधियों ने भी दिखाई रुचि
पौड़ी गढ़वाल। पहाड़ों में बिखरी कृषि भूमि को एक स्थान पर व्यवस्थित करने, भूमि विवादों को कम करने और खेती को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से चकबंदी मंच उत्तराखंड की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 29 अक्टूबर 2026 को पौड़ी गढ़वाल जनपद के दुगड्डा विकासखंड में स्वैच्छिक चकबंदी को लेकर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला का आयोजन स्वयंसेवी संस्था के सक्रिय कार्यकर्ताओं श्री शंकर दत्त सती, श्री सतेंद्र रावत, श्री कुलदीप बिष्ट एवं श्री मनु जुयाल के विशेष प्रयासों से किया गया।
कार्यशाला में चकबंदी मंच उत्तराखंड के अध्यक्ष श्री केवला नन्द तेवाड़ी (रानीखेत) एवं उपाध्यक्ष श्री भूपेंद्र सिंह बग्लाणा (ग्राम सूला, पौड़ी) सहित दुगड्डा के ज्येष्ठ प्रमुख, ग्राम प्रधान, ग्रामीणों, खंड विकास अधिकारी, एडीओ पंचायत एवं अन्य अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर मंच के अध्यक्ष श्री केवला नन्द तेवाड़ी ने ग्रामीणों को स्वैच्छिक चकबंदी की प्रक्रिया और उसके लाभों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने पूर्वजों के समय से गोलखातों में बिखरी कृषि भूमि को व्यक्तिगत खातों में दर्ज कराने तथा आपसी सहमति से भूमि की अदला-बदली कर एक या दो स्थानों पर चक बनाने के लिए संबंधित तहसीलों में अधिक से अधिक आवेदन प्रस्तुत करें।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन भूमिधरों ने आपसी सहमति से अपने एक-दो खेतों की अदला-बदली कर ली है, वे भी अपनी भूमि को व्यक्तिगत खातों में व्यवस्थित कराने के लिए अलग से आवेदन प्रस्तुत करें।
उन्होंने चकबंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे भूमि विवादों में कमी आएगी, खेती करना आसान होगा, कृषि भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो सकेंगे। साथ ही पलायन से प्रभावित गांवों को दोबारा आबाद करने में भी चकबंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कार्यशाला के दौरान दुगड्डा के ज्येष्ठ प्रमुख ने चकबंदी को ग्रामीण हितों से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताते हुए इसके क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और चुनौतियों पर भी चर्चा की। इस पर मंच के उपाध्यक्ष श्री भूपेंद्र सिंह बग्लाणा ने उनकी शंकाओं का समाधान किया।
इसके बाद ज्येष्ठ प्रमुख ने आश्वासन दिया कि आगामी बीडीसी बैठक में चकबंदी मंच के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच चकबंदी को लेकर व्यापक जागरूकता फैलाई जा सके। मंच के अध्यक्ष ने ग्रामीण विकास के प्रति उनकी सकारात्मक सोच और सहयोग की भावना की सराहना की।
वहीं, कार्यशाला में मौजूद महिला ग्राम प्रधान ने स्वीकार किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी चकबंदी को लेकर पर्याप्त जानकारी का अभाव है। उन्होंने लोगों को जागरूक करने की दिशा में चकबंदी मंच के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यशाला के समापन पर मंच के उपाध्यक्ष ने खंड विकास अधिकारी से आग्रह किया कि ग्राम पंचायतों की खुली बैठकों में भी अधिकारियों के माध्यम से चकबंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए, ताकि ग्रामीण सरकार के चकबंदी अधिनियम एवं नियमावली 2016/2020 तथा स्वैच्छिक एवं आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026 के अंतर्गत उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकें।
चकबंदी मंच उत्तराखंड का स्पष्ट संदेश है कि पहाड़ की बिखरी कृषि भूमि को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को मिलकर आगे आना होगा।

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