रिपोर्ट प्रताप सिंह नेगी
उत्तराखंड मे सरकार आई और गई लेकिन ये पांच किललो मीटर सडक बनाना भूल गई।
इस सड़क मार्ग के निर्माण कार्य न होने से क्षेत्रीय जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पडता है।सड़क तो झोडिये ठीक ढंग से चलने के लिए रास्ता तक नही है।सात आठ सालों से क्षेत्रीय लोग बिभागों के चक्कर काटते रहे ये फायल एक दप्पतर से दूसरे तक ही रह गई लेकिन सड़क कागजों में ही सिमित है।
इस सड़क मार्ग से क्षेत्रीय महिलायें जंगलों से घास व लकड़ी कैसे ले जाते है ।जब कभी कोई बुजुर्गे व गरवर्ती महिला को निकटतम मार्केट कनारीछीना ले जाना पड़ता है तो ढोली का सहारे से ले जाना पडता है।
इस सड़क मार्ग बनने से रीम,पिपलखेत,कनारी,बिनूक,पतलचौरा,चिमचुआ,आदि गांवों के ग्रामीण लाभवंनतित होते है।
पतलचौरा व चिमचुआ गांव अनुसूचित जाति का बाहुलि गांव उत्तराखंड के अनुसूचित जाति के गांवों के लिए सरकार हर चीज के लिए आरक्षण देती है।लेकिन पतलचौरा गांव चिमचुआ गांव आज रोड से बंचित है।
प्रताप सिंह नेगी इस सड़क मार्ग के निर्माण कार्य न होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा अगर 2027तक ये सड़क मार्ग नही बनी तो हम लोग आने वाली बिधान सभा के चुनाव में रोड नही वोट के लिए बाध्य हो सकते है।

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