चमोली-टीएचडीसी की जलविद्युत परियोजना के निर्माण कार्य का मलबा अलकनंदा नदी मे।
रिपोर्ट लोकेन्द्र रावत
पीपल कोटी विकासखण्ड दशोली चमोली -टीएचडीसी की जलविद्युत परियोजना के निर्माण कार्य में जुटी कार्यदायी संस्था हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा नियमों को ताक पर रखने का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पावर हाउस साइड से निकलने वाले मलबे (मक) को डंपिंग जोन में ले जाने के बजाय सीधे अलकनंदा नदी में बहाया जा रहा है। कार्यदायी संस्था की इस मनमानी से नदी के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है, जिससे स्थानीय जनता में गहरा आक्रोश है।
समाज सेवी राकेश नवानी का कहना है कि परियोजना निर्माण के दौरान निकलने वाले मलबे के निस्तारण के लिए निर्धारित डंपिंग जोन बनाए गए हैं। इसके बावजूद, परिवहन खर्च और समय बचाने के फेर में कंपनी द्वारा रात-दिन अलकनंदा नदी के किनारे ही मलबा डंप किया जा रहा है।
“नदी में सीधे मलबा डालने से न केवल जल का प्रवाह प्रभावित हो रहा है, बल्कि जलीय जीवों को भी नुकसान पहुँच रहा है। मानसून सीजन नजदीक है, ऐसे में नदी में डाला गया यह मलबा आगे चलकर भारी तबाही का कारण बन सकता है।”
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्यदायी संस्था ने तुरंत अलकनंदा नदी में मलबा डालना बंद नहीं किया, तो वे निर्माण कार्य को ठप कर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने तथा पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है।
इस संबंध में जब कंपनी के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनकी ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।





