पौडी

पीपलकोटी-नगर पंचायत पीपलकोटी में टी.एच.डी.सी. और उसकी कार्यदायी संस्था एच.सी.सी. की कार्यप्रणाली पर स्‍वाल।

रिपोर्ट  लोकेन्‍द्र रावत

पीपलकोटी। नगर पंचायत पीपलकोटी में टी.एच.डी.सी. और उसकी कार्यदायी संस्था एच.सी.सी. की कार्यप्रणाली को लेकर क्षेत्रीय जनता और जनप्रतिनिधियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। पदभार ग्रहण करने के बाद से ही नगर पंचायत अध्यक्ष को जनहित से जुड़ी गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि बार-बार पत्राचार के बावजूद संस्थाओं द्वारा कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में भारी असंतोष व्याप्त है।

नगर पंचायत अध्यक्ष पीपलकोटी आरती नवानी का कहना है, टी.एच.डी.सी. पिछले 15 वर्षों से क्षेत्र में अंग्रेजी माध्यम का स्कूल खोलने का केवल मौखिक आश्वासन दे रही है। यही नहीं, सीएसआर मद की धनराशि में भी भारी अनियमितता के आरोप लगे हैं।

नागपुर बंड क्षेत्र के सामाजिक कल्याण के लिए आवंटित धन को स्थानीय जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना अन्य क्षेत्रों में खर्च किया जा रहा है। मांग की गई है कि भविष्य में स्वामी विवेकानंद अस्पताल जैसी संस्थाओं को दी जाने वाली सहायता में स्थानीय पंचायत की सहमति अनिवार्य हो।

सबसे गंभीर आरोप टनल निर्माण से होने वाले प्रदूषण को लेकर हैं। टनल से निकलने वाले रसायन युक्त दूषित पानी को सीधे अलकनंदा नदी में बहाया जा रहा है, जिससे जलीय जीवों और नदी की पवित्रता पर संकट मंडरा रहा है। परियोजना के कारण महत्वपूर्ण गौचर भूमि समाप्त हो गई है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ गया है,टनल का मलबा घाटों और उनके रास्तों पर फेंकने से अंतिम संस्कार में बाधा आ रही है,
क्रेशर और बैचिंग प्लांट से होने वाले ध्वनि व वायु प्रदूषण ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

क्षेत्रीय जनता ने चारापत्ती के भुगतान से वंचित रखने और स्थानीय रोजगार की अनदेखी पर कड़ा एतराज जताया है। जनसुनवाई में 70% स्थानीय रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन आरोप है कि स्थानीय युवाओं और ठेकेदारों के बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।

सुरंग निर्माण के लिए किए जा रहे भारी विस्फोटों ने आवासीय और व्यावसायिक भवनों की नींव हिला दी है। कई घरों में दरारें आ चुकी हैं और प्राकृतिक पेयजल स्रोत सूख गए हैं। विभाग द्वारा न तो इनका निरीक्षण किया गया और न ही कोई मुआवजा दिया गया। वहीं, डम्पिंग जोन भर जाने के कारण अवैध स्थानों पर मलबा फेंका जा रहा है, जो भविष्य में किसी बड़ी आपदा को निमंत्रण दे रहा है।

जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि पूरे नागपुर बंड क्षेत्र को ‘प्रभावित’ या ‘आंशिक प्रभावित’ श्रेणी में रखा जाए, क्योंकि यहां के जंगल और गौचर पूरी जनता की आजीविका का आधार थे,सार्वजनिक स्थानों पर लगे बैरियरों को हटाकर केवल परियोजना सीमा के भीतर लगाया जाए, ताकि आम जनता के आवागमन में बाधा न आए। इस अवसर ज्ञापनदाताओं में आरती नवानी,कुमारी संतोषी,राकेश नवानी, आशीष कुमार,अंकित रावत मनोरमा देवी ,अनिल जोशी ,पवन कुमार ,संजय राणा,रविंद्र नेगी ,कुसुम रावत,संतोष रावत,संतोष कुमार नरेंद्र पोखरियाल,दीपक सती ,मुकिश सिंह,गुलाब सिंह बिष्ट,जगत सिंह नेगी ,रघुनाथ फर्स्वाण,हरेंद्र पंवार आदि शामिल थे।

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