भारतीय ज्ञान परम्परा और वैश्विक ज्ञान में संस्कृत का योगदान विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में होगा ‘मंथन’ ..!
रिपोर्ट- पं कपिल शर्मा जौनसारी
उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय और विदेश मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय ज्ञान परम्परा और वैश्विक ज्ञान के विकास में संस्कृत की अमूल्य भूमिका पर गहन विचार-विमर्श के लिए एक विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
यह महा-मंथन, जिसका शीर्षक “भारतीय ज्ञान परम्परा तथा वैश्विक ज्ञान के विकास में संस्कृत का योगदान” है, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय (हरिद्वार), विदेश मंत्रालय, भारत सरकार और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (नई दिल्ली) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।
दिनांक: 30 नवम्बर, 2025 एवं 01 दिसम्बर, 2025
स्थान: उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी, प्रेक्षागृह, हरिद्वार
आयोजक: उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, विदेश मंत्रालय (भारत सरकार), एवं केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
यह दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘मंथन’ संस्कृत भाषा, साहित्य और दर्शन के वैश्विक प्रभाव पर केंद्रित है।
प्रतिष्ठित सहभागिता: इस सम्मेलन में देश-विदेश के संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रख्यात विद्वान विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार और शोध प्रस्तुत करेंगे।
सत्रों की रूपरेखा: सम्पूर्ण कार्यक्रम उद्घाटन और समापन समारोह (संलग्न है) के अतिरिक्त 19 तकनीकी सत्रों (Technical Sessions) में आयोजित होगा, जो गहन अकादमिक विमर्श का केंद्र बनेंगे।
यह सम्मेलन वैश्विक मंच पर संस्कृत के महत्व को स्थापित करने तथा भारतीय ज्ञान की समृद्धि को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दिनेश शास्त्री ने बताया कि इस अंतराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में बहरीन, कजाकिस्तान, मलेशिया, बेलारूस, मंगोलिया, थाईलैंड, श्रीलंका, रूस, इथियोपिया सहित अन्य देशों के विद्वानों के विशिष्ट व्याख्यान होंगे। साथ ही कहा कि देश भर के प्रतिष्ठित विद्वान इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में अपने विशिष्ट व्याख्यान देंगे।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव दिनेश कुमार राणा ने बताया कि उद्घाटन सत्र में प्रदेश के माननीय संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री तथा पूर्व राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी जी , अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी रवींद्र पुरी क्षेत्रीय विधायक श्री आदेश चौहान जी, विदेश मंत्रालय की सचिव ( दक्षिण) डॉ नीना मल्होत्रा और संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक गैरोला उपस्थित रहेंगे तथा समापन समारोह के अंतिम सत्र 1 दिसंबर को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, स्वामी चिदानंद मुनि जी प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे
विदेश से पधारने वाले विद्वान
1- श्री स्वामी संयुक्तानंद जी -फ़िजी
2-श्री पंकजाक्ष माधवदास-बहरीन
3-श्री स्वामी सतप्रकाशानंद सरस्वती जी-मलेशिया
4-श्री लुवसंदोरज त्सेत्से, मंगोलिया
5- श्री सानित सीनक, थाईलैण्ड
6- डॉ० इलिया टार्कन, बेलारूस
7- श्री डैनियल ह्यूम (श्री महाप्रस्थान गोविंद) -इथियोपिया
8- श्री ऐत्जानोवा असील-कज़ाखस्तान
9- डॉ० असंग तिलकरत्ने , श्रीलंका
10- प्रो० दिवाकर शुक्ला, लंदन
11- डॉ० मारसिस गैसुन्स, रूस
इस अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के संयोजक डॉ. सुमन भट्ट तथा समन्वयक डॉ.प्रकाश पंत है





