हरिद्वार

सरकारी आदेशों की अनदेखी, सेवानिवृत्त राजपत्रित अधिकारी 8 माह से भुगतानों को तरसा -आर्थिक तंगी में गुजर रहा जीवन।

संवाददाता – लोकेंद्र रावत

हरिद्वार/ उत्तराखंड। वन विभाग में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित देयकों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि शासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे एक सेवानिवृत्त राजपत्रित वन क्षेत्राधीकारी श्री धीर सिंह को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सेवानिवृत्त राजपत्रित वन क्षेत्राधीकारी श्री धीर सिंह को सेवानिवृत्ति के लगभग आठ माह बीत जाने के बाद भी उनके समस्त देयकों का भुगतान नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, वर्ष 2024 के सात माह के वेतन भुगतान का मामला भी अब तक लंबित बताया जा रहा है।
बताया गया है कि शासन के नियमानुसार कर्मचारी की सेवानिवृत्ति से छह माह पूर्व सभी आवश्यक अभिलेखीय एवं वित्तीय प्रक्रिया पूरी कर ली जानी चाहिए, ताकि सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद पेंशन और अन्य देयक जारी हो सकें। इसके बावजूद संबंधित स्तर पर लापरवाही और शिथिलता के कारण मामला अटका हुआ है।
सूत्रों के अनुसार उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बाद भी विभागीय स्तर से समय पर स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे प्रकरण और लंबा खिंच गया। आरोप है कि देरी के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारी आर्थिक परेशानियों से गुजर रहे हैं और उन्हें घर चलाने के लिए ऋण लेना पड़ रहा है।
परिजनों का कहना है कि नियमित आय बंद होने से घरेलू खर्चों का संकट खड़ा हो गया है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच आर्थिक तंगी ने परिवार की चिंता और बढ़ा दी है।
यह भी बताया गया है कि पीड़ित कर्मचारी ने अपनी समस्याओं को लेकर सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हो सका है। परिवार का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे अन्य वैधानिक मंचों,महीला आयोग आदि का सहारा लेने को भी मजबूर होंगे।
स्थानीय लोगों और कर्मचारी संगठनों ने शासन एवं विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए लंबित वेतन, पेंशन एवं अन्य देयकों का तत्काल भुगतान कराया जाए, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारी को राहत मिल सके।

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