Home उत्तराखंड अल्‍मोडा अल्मोड़ाआंगनबाड़ी केंद्र और कार्यकर्त्री होते हुए भी शिक्षा व पोषण से वंचित बच्चे –कौन है जिम्मेदार?
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अल्मोड़ाआंगनबाड़ी केंद्र और कार्यकर्त्री होते हुए भी शिक्षा व पोषण से वंचित बच्चे –कौन है जिम्मेदार?

रिपोर्ट प्रताप सिंह नेगी

अल्मोड़ा – भैसियाछाना बिकास खंड ग्राम सभा बबुरियानायल में आंगनबाड़ी केंद्र और दो-दो आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री होते हुए भी बच्चों को न तो शिक्षा मिल पा रही है और न ही पोषण संबंधी सुविधाएँ।

दरअसल, ग्रामसभा बबुरियानायल में तीन राजस्व ग्राम – बबुरियानायल, बिटुलिया और गौनाप आते हैं। गौनाप गाँव सबसे दुर्गम क्षेत्र में स्थित है, जो ग्राम बिटुलिया से 4 किमी और ग्राम बबुरियानायल से 7 किमी की पैदल दूरी पर है। यह क्षेत्र बिनसर वन्यजीव विहार के घने जंगल से घिरा हुआ है। बिटुलिया और बबुरियानायल में कोई बच्चा (1-5 वर्ष) नहीं है, लेकिन यहाँ आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री तैनात हैं। वहीं, गौनाप गाँव में 1-5 वर्ष के 6 बच्चे हैं, लेकिन यहाँ आंगनबाड़ी केंद्र और कार्यकर्त्री का अभाव है।

भारत सरकार की समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। इस योजना के तहत पूरक पोषण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच, पोषण जागरूकता और किशोरी सशक्तिकरण की सुविधाएँ दी जाती हैं, लेकिन गौनाप गाँव के बच्चों को ये सेवाएँ नहीं मिल पा रही हैं।

स्थानीय निवासी श्रीमती पूजा बोहरा का कहना है कि “ना हमारे बच्चों के लिए कोई आंगनबाड़ी केंद्र है, ना कोई आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री। प्राथमिक विद्यालय में बच्चे को भेजती हूँ, तो शिक्षक कहते हैं कि 6 साल से पहले प्रवेश नहीं होगा। मजबूरी में अब पलायन कर शहर में बच्चे का दाखिला कराना पड़ रहा है।”

ग्राम प्रधान बबुरियानायल का कहना है कि “BTC बैठक में CDO अल्मोड़ा और CDPO के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया था। CDPO मैडम ने गाँव में दौरा करने का आश्वासन दिया था। लिखित और मौखिक रूप से कई बार निवेदन भी किया गया, लेकिन एक साल बीत जाने के बावजूद किसी भी अधिकारी ने दौरा नहीं किया।”

अब सवाल यह है कि जब गाँव में बच्चे हैं तो आंगनबाड़ी सेवाएँ क्यों नहीं मिल रहीं। प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन केवल दिखावा थे या सच में इन बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। क्या हर बार शिक्षा और पोषण के लिए गाँव के लोगों को पलायन करना ही पड़ेगा।

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