पौडी- उत्तराखंड क्रांति दल के उभरते चेहरे मुकेश बिष्ट: संघर्ष, समाजसेवा और नवाचारी खेती की प्रेरक मिसाल
रिपोर्ट प्रवीन बिष्ट लैंसीडाउन
पौड़ी गढ़वाल जनपद के रिखणीखाल विकासखंड अंतर्गत चौकड़ी गांव में जन्मे श्री मुकेश बिष्ट आज उत्तराखंड क्रांति दल के एक उभरते हुए और प्रेरणादायक चेहरे के रूप में पहचान बना चुके हैं। वर्ष 1980 में एक साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में जन्मे मुकेश बिष्ट जी का जीवन संघर्ष, परिश्रम और सामाजिक चेतना का जीवंत उदाहरण है।
आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल न होने के कारण उनकी प्रारंभिक शिक्षा अपने मामा के गांव सुंदरोली स्थित जनता इंटर कॉलेज, किलबोखाल से संपन्न हुई। 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत वे रोजगार की तलाश में दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने एक फैक्ट्री में मशीन ऑपरेटर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। पिता के निधन के बाद, छह भाई-बहनों में सबसे बड़े होने के कारण परिवार की संपूर्ण जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। इसके बावजूद, उन्होंने कभी सामाजिक कार्यों से दूरी नहीं बनाई और सदैव समाजहित के कार्यों में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई।
वर्ष 2023 में मुकेश बिष्ट जी ने पहाड़ों में चंदन की खेती का एक अभिनव सपना देखा और उसे साकार करने का साहसिक निर्णय लिया। अपने गांव की भूमि पर उन्होंने लगभग 160 से अधिक सफेद चंदन के पौधे रोपित किए, जिससे वे संपूर्ण गढ़वाल क्षेत्र में चंदन की खेती की शुरुआत करने वाले पहले व्यक्ति बने। इसके साथ ही उन्होंने आंवला, रीठा, तेजपत्ता, हरी सब्जियां, ऑस्ट्रेलियन चीड़, खीरा आदि की भी खेती प्रारंभ की।
आज तीन वर्षों के भीतर उनके लगाए गए चंदन के 125 से अधिक पौधे सुरक्षित एवं जीवित हैं, जो 3 से 4 फीट तक विकसित हो चुके हैं। यह पहल उस धारणा को तोड़ती है कि चंदन केवल मैदानी क्षेत्रों में ही संभव है। मुकेश बिष्ट जी ने अपने प्रयासों से यह सिद्ध कर दिया कि जहां चाह होती है, वहीं राह होती है।
वर्तमान में मुकेश बिष्ट जी लैंसडौन क्षेत्र के रिखणीखाल इलाके में एक प्रेरक व्यक्तित्व (Motivational Personality) के रूप में उभर चुके हैं। वे न केवल लोगों को चंदन की खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं, बल्कि इच्छुक किसानों और युवाओं को निःशुल्क चंदन के पौधे उपलब्ध कराने के लिए भी सदैव तत्पर रहते हैं।
लैसीडाउंन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव मे अपनी दावेदारी पेश कर रहे है पर बिना जाने लोग कह रहे है की दिल्ली शहर से चुनाव नही लडा जा सकता पर पर मुकेश बिष्ट तो पहाड मे ही है पर यह न भुले कांग्रेस भाजपा के लोग कोटद्वार या देहरादून रह रहे है तब भी बाप उनको वोट दे रहे पर जो गांव मे काम कर रहो लोगो की मदद कर रहा उसके बारे मे जाने बिना कह देना सही नही 25 सालो से जिन नेताओ को वोट दिया उन्होने हमे जंगली जानवरी बंजर खेती दी है और शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के लिए पलायन पर फिर भी उनको वोट देना अब बदलाव का दौर है जल जंगल जमीन की लडाने लडने वाली पार्टी को मौका नही दिया तो अब देना है।
आप सभी को अंंग्रेजी नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाऐं।
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