पिथौरागढ। रिपोर्टर खीमानंद सोबन सिंह जीना (SSJ) विश्वविद्यालय में प्रशासनिक कारगुजारियों और विवादों की फेहरिस्त लगातार लंबी होती जा रही है। विधि (Law) पाठ्यक्रम की मान्यता पर हुई किरकिरी का घाव अभी पूरी तरह भरा भी नहीं था कि अब शिक्षा शास्त्र के शिक्षक से जुड़ा हुआ मामला सामने आया है। सोमवार को पिथौरागढ़ परिसर निदेशक हेम चंद्र पांडेय द्वारा जारी एक तुगलकी आदेश ने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक बदहाली और गैर-जिम्मेदाराना रवैये की पोल खोलकर रख दी है।
परिसर निदेशक पिथौरागढ़, प्रो. हेम चंद्र पांडेय द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश ने पूरे शैक्षणिक जगत को हैरान कर दिया है। कुलपति के निर्देशों का हवाला देते हुए जारी इस आदेश में शिक्षा संकाय (Education Department) के प्राध्यापक को गणित (Mathematics) विषय पढ़ाने का आदेश सुना दिया गया है!
नियुक्ति किस विषय में, अध्यापन किसमें? छात्रों से सीधा खिलवाड़!
एक ओर जहाँ विश्वविद्यालय में बिना पुख्ता मान्यता के M.Ed. पाठ्यक्रम संचालित करने, शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियों और संबद्धता (Attachment) के खेल को लेकर पहले से ही भारी रोष व्याप्त है; वहीं दूसरी ओर किसी अन्य विषय के विशेषज्ञ प्राध्यापक से जबरन गणित जैसा विषय पढ़वाने के आदेश ने विश्वविद्यालय की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यहाँ कई तीखे और सीधे सवाल पैदा होते हैं:
नियुक्ति बनाम अध्यापन: जब प्राध्यापक की नियुक्ति शिक्षाशास्त्र (Education) के लिए हुई है, तो उन्हें किस नियम, मानक या अकादमिक योग्यता के तहत गणित पढ़ाने का अधिकार दिया गया?
मूल विषय के छात्रों का क्या? जिस विषय (Education/M.Ed.) के लिए शिक्षक को नियुक्त किया गया था, उनके मूल विषय के छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन का क्या होगा? क्या उनका अध्यापन कार्य रामभरोसे छोड़ दिया गया है?
गुणवत्ता पर प्रहार: क्या कोई गैर-विषय विशेषज्ञ प्राध्यापक गणित जैसे तकनीकी और जटिल विषय के साथ न्याय कर पाएगा? क्या यह सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य और उनकी शिक्षा की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ नहीं है?
कागज़ों में सिमटा विश्वविद्यालय, परिसरों का हाल बेहाल
विश्वविद्यालय प्रशासन की इस कार्यशैली से साफ जाहिर होता है कि शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं। पिथौरागढ़ परिसर की वर्तमान बदहाली चिंताजनक है, लेकिन आला अधिकारी जमीनी हकीकत से बेखबर नजर आ रहे हैं।अब कागजी लीपापोती नहीं, जवाबदेही तय होनी चाहिए!
यह मामला सिर्फ एक तबादले या कार्य आवंटन का नहीं है, बल्कि यह सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय की प्रशासनिक पारदर्शिता, अकादमिक मानकों और सैकड़ों छात्रों के करियर से जुड़ा सीधा मुद्दा है।
पिथौरागढ़ परिसर निदेशक और विश्वविद्यालय प्रशासन को इस हास्यास्पद आदेश पर तुरंत स्थिति स्पष्ट करनी होगी। छात्रों के भविष्य की कीमत पर प्रशासनिक मनमानी और लीपापोती का खेल अब बंद होना चाहिए—इस तुगलकी आदेश की जिम्मेदारी तय हो और जवाब सार्वजनिक मंच पर दिया जाए!

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