गोपेश्वर-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्वदेशी ज्ञान प्रणाली और सतत विकास पर हुआ मंथन
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्वदेशी ज्ञान प्रणाली और सतत विकास पर हुआ मंथन
गोपेश्वर: स्वदेशी ज्ञान प्रणाली और सतत विकास विषय पर आधारित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन दिनांक 26 नवंबर 2025 को प्रौद्योगिकी संस्थान (Institute of Technology) गोपेश्वर में किया गया। यह सम्मेलन हर्बल रिसर्च एंड डेवलेपमेंट इंस्टिट्यूट (HRDI) मंडल, श्री देव सुमन विश्वविद्याल कैंपस गोपेश्वर तथा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोपेश्वर के संयुक्त सहयोग से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम संस्थान के ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भागीदारी की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, सचिव, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, देहरादून। सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं—
डॉ. त्रिप्ता ठाकुर, कुलपति, वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय, देहरादून
तथा पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, पर्यावरणविद् एवं मैती आंदोलन के संस्थापक।
इसके अतिरिक्त डॉ. अभिषेक त्रिपाठी (PCS), निदेशक हर्बल रिसर्च एंड डेवलेपमेंट इंस्टिट्यूट, मंडल एवं मुख्य विकास अधिकारी, चमोली भी विशिष्ट अतिथि रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता—
* प्रो. एम. पी. नागवाल, प्रिंसिपल, श्री देव सुमन विश्वविद्यालय कैंपस, गोपेश्वर
* प्रो. अमित अग्रवाल, डायरेक्टर, प्रौद्योगिकी संस्थान गोपेश्वर
द्वारा संयुक्त रूप से की गई।
सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल रहे—
* प्रो. रोनिका मुंडाले, विज्ञान एवं शिक्षा क्लस्टर, क्वाज़ुलु-नताल विश्वविद्यालय, डरबन (दक्षिण अफ्रीका)
* प्रो. विमोलान मुंडाले, गणित शिक्षा क्लस्टर, क्वाज़ुलु-नताल विश्वविद्यालय, डरबन (दक्षिण अफ्रीका)
* डॉ. नरेंद्र डी. देशमुख, पूर्व वैज्ञानिक अधिकारी F, HBCSE, TIFR, मुंबई
* डॉ. सुरेश पांडे, प्रेसिडेंट, सीड, आंध्र प्रदेश
* डॉ. राकेश गैरोला, वैज्ञानिक एवं उद्यमी, गोपेश्वर
* डॉ. संध्या ए. ठाकुर, पर्यावरण शिक्षाविद, मुंबई

कार्यक्रम के संयोजक प्रो. अमित के. जायसवाल थे।
मंच का संचालन डॉ. दर्शन सिंह नेगी एवं डॉ. विधि द्वारा किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके उपरांत उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया।
संस्थान के निदेशक डॉ. अमित अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया और सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की।
सम्मेलन में वक्ताओं ने स्वदेशी ज्ञान प्रणाली, सूचना प्रौद्योगिकी का एकीकरण, औषधीय पौधों का उपयोग, पोषण, जैविक कीट नियंत्रण तथा सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
* पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने उत्तराखंड के बुग्यालों के संरक्षण, पारंपरिक वन संस्कृति और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
* डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी को जीवनशैली का हिस्सा बनाना आज की आवश्यकता है।
* कुलपति डॉ. त्रिप्ता ठाकुर ने तकनीकी शिक्षा और सतत विकास के माध्यम से युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की बात कही।
* अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने भारत की समृद्ध स्वदेशी परंपराओं और वैज्ञानिक अनुसंधान के एकीकरण को विश्व के लिए एक मॉडल बताया।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. अमित के. जायसवाल ने सभी मुख्य अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों तथा आयोजकों का आभार व्यक्त किया और सम्मेलन की सफलता की घोषणा की।
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