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ग्राम पर्यटन से बढ़ेगा रोज़गार: ‘भलू लगद’ की ने की पहल

कल्पना करो कि रोजमर्रा की थकान भरी जिंदगी से दूर कुछ दिनों के लिए आपको ऐसे माहौल में भेज दिया जाय जहाँ सुबह सवेरे का अलार्म पक्षियों का कलरव हो, जहाँ आँखे खोलते ही सूरज की किरणें आपका स्वागत करें, जहाँ आपके और पशु पक्षियों के दिन की शरूआत साथ – साथ हो, जहाँ साँस लेने के लिए ताज़ी हवा और खाने के लिए जैविक खाना हो। कैसा आनंददायी अनुभव है न यह?क्या आप इस अनुभव को नहीं लेना चाहेंगे?

अगर ऐसे अनुभव लेने हैं तो आपको आना होगा ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां शहरों में यह सब एक कल्पना मात्र है। वहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में यह रोज की सच्चाई है। रोजमर्रा की भागदौड़ वाली ज़िंदगी से कुछ दिन आराम लेने के लिए ग्राम पर्यटन का यह विचार बहुत ही आनंददायी है। रोजमर्रा की ज़िंदगी से जब हम थक जाते हैं तो कुछ दिनों के लिए ही सही हम माहौल बदलने के बारे में सोचते हैं। अलग.-अलग लोगों के विचार में माहौल बदलने का तरीका अलग होता है। कोई धार्मिक स्थल जाता है, कोई किसी प्रसिद्ध इमारत या प्रसिद्ध जगह के भ्रमण पर, तो कोई किसी रमणीक स्थल को चुनता है। ग्राम पर्यटन भी माहौल बदलने का एक जबरदस्त तरीका है।

पर्यटन से आयेगी गाँव में रौनक

आजकल ग्राम पर्यटन काफी चर्चा में है। ग्रामीण इलाकों का स्वच्छ व सुंदर माहौल प्रत्येक पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करता है। ग्रामीण जीवनशैली को सीखना, इसका अनुकरण करना यहाँ की संस्कृति व सभ्यता से रूबरू होना, कल्पना करने मात्र से आनंददायी लग रहा है।ग्राम पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु भलु लगद (फीलगुड) संस्था भी हरसंभव प्रयास कर रही है। और अभी तक तीन सफल प्रयास कर चुकी है। अभी तक तीन बार दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र यहाँ की संस्कृति व सभ्यता से रूबरू हो चुके हैं।

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